महेंद्र तिवारी
स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) पुणे में 3 से 8 फरवरी तक ताइक्वांडो की नेशनल चैंपियनशिप आयोजित हुई थी। इसके लिए मप्र की टीम का प्री नेशनल कोचिंग कैंप 27 जनवरी से 1 फरवरी तक इंदौर में हुआ था। यहीं से टीम पुणे गई थी। डीपीआई ने इंदौर के व्यायाम शिक्षक को टीम का मैनेजर बनाया था। इसके चलते इंदौर डीईओ को मैनेजर की मांग के अनुसार अग्रिम राशि देने को कहा गया था। डीईओ ऑफिस ने राशि तो दी, पर आगे से पहले एडवांस देने में असमर्थता जाहिर कर दी।
महेंद्र तिवारी इंदौर
स्कूल गेम्स की राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में मेजबानी और राष्ट्रीय स्पर्धाओं में जिले के शिक्षकों के दल के प्रबंधक बनने पर संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय प्रदेश की टीमों के रहने और िकट आदि का खर्च वहन करता है।
लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) की व्यवस्था के तहत हर प्रतियोगिता से पहले डीईओ अपने फंड से एडवांस राशि देता है, फिर बाद में डीपीआई इसका अलॉटमेंट जारी करता है। डीईओ के खजाने से पैसा तो चला जाता है, पर भरपाई महीनों तक नहीं होती है। ऐसे में जिला कार्यालयों में क्रीड़ा मद में काफी कम पैसा बचता है। शेष पेज 3 पर
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15 लाख रुपए बाकी, मना किया तो अकेले इंदौर से मांगा हिसाब