डीबी स्टार
साइन लैंग्वेज को 23वीं भाषा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए कर रहे हैं प्रयास
डीबी स्टार इंदौर
ज्ञानेंद्र पुरोहित बचपन में दिव्यांग बड़े भाई के प्रति लोगों के मजाकिया रवैये से वे बहुत दुखी होते थे। भाई की असमय मृत्यु ने उन्हें झकझोर दिया। सीए की पढ़ाई बीच में छोड़कर दिव्यांगों की सेवा का संकल्प लिया। इस कार्य में प|ी मोनिका भी साथ आ गईं। आज वे धार, आलीराजपुर और खंडवा के ट्राइबल एरिया में तीन सेंटरों के जरिए करीब 500 दिव्यांग बच्चों के लिए काम कर रहे हैं। हाल ही में मोनिका को राष्ट्रपति पुरस्कार से तथा ज्ञानेंद्र को राष्ट्रीय स्वयंसिध्द सेवा सम्मान से नवाजा गया है।
ज्ञानेंद्र पुरोहित
अमिताभ बच्चन ने की अपील
साइन लैंग्वेज में बनाया राष्ट्रगान
पुलिस थाने में प्रबंध
मूक-बधिरों को अन्याय के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पुरोहित दंपति ने तुकोगंज थाने पर इसके लिए नई पहल की। अब पीड़ित से साइन लैंग्वेज में घटना की जानकारी लेकर प्रकरण दर्ज किया जाता है। मोनिका कहती हैं, पंद्रह सालों में 256 मामले रजिस्टर्ड किए गए।
ज्ञानेंद्र ने 2002 में साइन लैंग्वेज में राष्ट्रगान बनाया। उन्होंने देशभर के मूक-बधिरों से मुलाकात की और राष्ट्रगान के मुताबिक इशारे एकत्र किए। मामला राष्ट्रगान से जुड़ा और भाव-भंगिमाओं पर आधारित था। उस पर राष्ट्रगान को 52 सेकंड के तय समय में पूरा करने की चुनौती भी थी। अतत: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की इंदौर यात्रा के दौरान उनके सामने इसकी प्रस्तुति दी।
मूक-बधिरों की सेवा के लिए पुरोहित ने पढ़ाई तक छोड़ दी
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