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कभी जलूद से आ रही लाइन में तो कभी शहर की सड़कों के अंदर से बहता है पानी

5 वर्ष पहले
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...इधर, निगम ने जोनवार अलग अमला तैयार किया
शहर में भले ही सामान्य दिनों में जल संकट न हो, लेकिन कभी शटडाउन के नाम पर तो कभी फीडर या बांड सड़कों के अंदर से निकलने वाला पानी जनता की परेशानी बनता है। सोमवार को किशनगंज महू के पास नर्मदा थर्ड फेस की 1700 एमएम व्यास की ग्रेविटी लाइन में लीकेज के बाद निगम को शटडाउन लेना पड़ा, जिसका काम मंगलवार शाम को पूरा हुआ। रात में पानी इंदौर पहुंचेगा, जिससे बुधवार को कुछ टंकियों से सप्लाय कम दबाव से होगा। मंगलवार को भी इसी कारण डायरेक्ट सप्लाय प्रभावित हुआ।

पिछले छह माह में तीसरी बार निगम को शटडाउन लेना पड़ा। दूसरी ओर शहर में कई ऐसे स्थान हैं, जहां लंबे समय से पानी के लीकेज की परेशानी है। इसमें पहले भंवरकुआं और मंगलसिटी के सामने समस्या थी। यहां खुदाई के बाद निगम ने लाइन सुधारी तो अभी भी रेसकोर्स रोड, ग्रेटर कैलाश के सामने और बीआरटीएस पर शालीमार टाउनशिप के पास इसी तरह पानी बहता है। प्रोजेक्ट अफसर भी मानते हैं कि सड़क निर्माण के दौरान कई बार बाद में प्रेशर से लाइन फूटती है तो आसानी से लीकेज सामने नहीं आता।

प्रोजेक्ट इंचार्ज व कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव के मुताबिक जो फर्स्ट और सेकंड फेस की लाइन है वह 1978 की है। 30 से 35 साल पुरानी इस लाइन में लीकेज आता है, जिसे पूरी तरह बदला जाएगा। महापौर मालिनी गौड़ भी इस संबंध में सर्वे के लिए कह चुकी हैं। श्रीवास्तव ने बताया ग्रेटर कैलाश के सामने कनेक्शन देने के कारण लीकेज हुआ है, वहीं रेसकोर्स रोड, शालीमार के सामने सड़क निर्माण के दौरान ही लाइन फूटी। अब ऐसे ही स्थानों को सुधारा जा रहा है, जिससे पानी की दिक्कत कम से कम हो।

ये काम करेंगे
गरमी में दिक्कत न हो, इसलिए अभी लिया शटडाउन
ठंड की वजह से अभी शटडाउन लिया गया है, ताकि गरमी में कोई दिक्कत न आए। शहर में जहां तक लाइन लीकेज और पानी के बहाव की बात है, हमने जोन वार विशेष रूप से अमला नियुक्त कर दिया है। ऑर्डर भी जारी हो गया, ताकि शहर किसी एक अधिकारी के भरोसे न रहे। - मनीष सिंह, निगमायुक्त

कहीं पानी की लाइन फूटने तो कहीं अवैध कनेक्शन या पानी के बिल में गड़बड़ी हो या नल कनेक्शन की जांच सहित अन्य मामलों की शिकायतें नगर निगम के पास भी लगातार आ रही हैं। इसी को देखते हुए महापौर ने निगमायुक्त को पूरा ढर्रा बदलने के निर्देश दिए थे। इसी के बाद अब यह काम जोन अधिकारी न करते हुए प्रत्येक जाेन पर सहायक यंत्री, उपयंत्री, फिटर करेंगे। प्रत्येक जोन पर इसके लिए एक अलग से बाबू भी नियुक्त किया गया है।

शालीमार टाउनशिप के सामने बीआरटीएस कॉरिडोर पर एक साल से ज्यादा समय से नर्मदा लाइन लीकेज है। इसके अलावा भी अन्य जगह यही हाल हैं, लेकिन इसे सुधारने पर किसी का ध्यान नहीं है।

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