सिटी रिपोर्टर
गायकी अभिनय को बेहतर बनाती है
सानंद न्यास की ओर से 13 व 14 फरवरी को नाटक परफेक्ट मिसमैच के मंचन के सिलसिले में वे इंदौर आ रही है। सिटी भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि चूंकि मैं गायिका भी हूं लिहाजा नाटक में निभाए जा रहे चरित्र के संवाद को सही पिच, सही टोन के साथ डिलीवर करना मेरे लिए आसान हो जाता है। ख्यात निर्देशिका विजया मेहता के नाटक हमीदा बाई की कोठी में तो मैंने एक चरित्र निभाते हुए ग़ज़लें भी गाईं। मुझे लगता है गायकी अभिनय को ज्यादा बेहतर बनाती है क्योंकि यह चरित्र के सुर को
सिटी रिपोर्टर मराठी-हिंदी फिल्मों, टीवी और रंगमंच की अभिनेत्री अमृता सुभाष का कहना है कि निभाए जा रहे हर चरित्र का एक सुर होता है। उस चरित्र के स्वभाव के अनुसार ही उसका सुर निश्चित होता है। इस चरित्र के साथ ही उस सुर को भी समझना ज़रूरी है। इससे उस चरित्र को गहराई से निभाना आसान हो जाता है। यह बात मुझे मेरे गुरु ख्यात रंगकर्मी स्वर्गीय पंडित सत्यदेव दुबे ने एनएसडी में सिखाई थी। अमृता सुभाष ने बाकायदा भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लिया है। इसके अलावा वे बहुत अच्छी गायिका हैं और उनका म्यूज़िक एलबम भी रिलीज़ हो चुका है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से निकलने के बाद वे फिल्मों और रंगमंच में सक्रिय हैं।
interaction
नसीर सर मेरे नाटक देखने आते थे
गुलज़ार साहब ने बताया कैसी होना चाहिए टाइमिंग
हर कैरेक्टर के एक खास सुर को समझना ज़रूरी
मराठी फिल्मों-टीवी-रंगमंच की अभिनेत्री अमृता सुभाष ने सिटी भास्कर से कहा-