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एक मशीन भी चालू हो जाए तो चल जाएगा एमवाय के मरीजों का काम

5 वर्ष पहले
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इंदौर डीबी स्टार

मरीज के खून का सैंपल मशीन में डालने पर कार्टेज खून की बूंद को ऊपर खींचकर रसायन तत्वों की स्कैनिंग करता है। एबीजी रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर तय करते हैं कि मरीज को क्या इलाज देना है। यानी एमवायएच में जिन मरीजों की एबीजी रिपोर्ट नहीं होती है उनका इलाज डॉक्टर अनुभव और परिस्थिति के अनुसार ही कर रहे हैं।

दो मिनट का काम, 4 घंटे में

एबीजी मशीन से जो टेस्ट दो मिनट में हो सकता है उसके लिए मरीज को घंटों इंतजार करना पड़ता है। एमवायएच में मरीज का ब्लड सैंपल आइस पैक पर रखकर निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। वहां से जांच रिपोर्ट आने में 4-5 घंटे लग जाते हैं। तब तक डॉक्टर बगैर रिपोर्ट के ही इलाज करते हैं।

यह कर सकता है प्रशासन
एबीजी मशीनों के मामले में कमीशन का खेल मरीजों पर भारी पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है, सभी निजी अस्पतालों में एक-एक एबीजी मशीन होती है। एमवायएच में ही एक साथ तीन मशीनें खरीदी गईं। यदि प्रशासन को तीन मशीनों के कार्टेज खरीदना महंगा लगता है तो वह एक ही मशीन के लिए कार्टेज खरीदे। इससे बजट की भी दिक्कत नहीं आएगी और मरीजों को भी सही इलाज मिलेगा।

निजी अस्पतालों के भरोसे है जांच
एबीजी मशीन में कई जांचों की सुविधा है। डॉक्टरों के मुताबिक मरीज के सभी टेस्ट 100 रुपए से भी कम कीमत में हो जाते हैं। अभी हर जांच के लिए निजी अस्पतालों का मुंह देखना पड़ता है, जो हर जांच की अलग-अलग फीस लेते हैं। इस तरह हर एबीजी टेस्ट पर मरीज को 700-800 रुपए का खर्च आता है।

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