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इंदौर/ग्वालियर

5 वर्ष पहले
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मार्च-अप्रैल से मप्र में नीले केरोसिन पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे बैंक खातों में जमा होगी। राज्य शासन ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अगले वित्तीय वर्ष से इसे लागू किया जाएगा। इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तहत की जाएगी।


इंदौर/ग्वालियर डीबी स्टार

राशन कार्ड पर मप्र के 1 करोड़ 14 लाख 90 हजार उपभोक्ताओं को मिलने वाले नीले केरोसिन की सब्सिडी अब उनके बैंक खातों में जमा होगी। रसोई गैस की सब्सिडी की तर्ज पर नीले केरोसिन पर मिलने वाली सब्सिडी का भी डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) किया जा रहा है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने डीबीटी के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन का दावा है कि इसी मार्च-अप्रैल से इसे लागू कर दिया जाएगा। भारत सरकार की डीबीटी योजना के तहत मप्र दूसरा राज्य होगा, जहां नीले केरोसिन की सब्सिडी भी उपभोक्ताओं के खातों में जमा की जाएगी। इसके पहले झारखंड में यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है। वर्तमान में केरोसिन की पीडीएस दर 16 से 18 रुपए प्रति लीटर है। इस पर 10 से 12 रुपए सब्सिडी दी जा रही है। सब्सिडी मिलाकर इसकी लागत 28 से 30 रुपए प्रति लीटर होती है। वर्तमान में दी जा रही सब्सिडी को आधार मानकर ही प्रस्ताव तैयार किया गया है।

व्यवस्था लागू करने के बाद उपभोक्ताओं को केरोसिन का 28 से 30 रुपए प्रति लीटर भुगतान करना होगा। उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी उनके बैंक खाते में जमा हो जाएगी। इसके नंबर जल्द ही उनके बैंक खातों से जोड़ दिए जाएंगे। प्रदेश में 2 लाख 80 हजार लीटर केरोसिन की खपत हर महीने होती है। नीले केरोसिन की कालाबाजारी धड़ल्ले से की जा रही है। इसका लिए सभी उपभोक्ताओं के आधार कार्ड इस्तेमाल वाहनों में ईंधन के रूप में किया जाता है। लाखों ऑटो गैरेज वालों को इस केरोसिन की जरूरत प्रति दिन पड़ती है। बाजार में सफेद केरोसिन करीब 70 रुपए लीटर मिलता है। नीले व सफेद केरोसिन की दरों में बड़ा अंतर होने के कारण नीले केरोसिन की कालाबाजारी होती है। फिलहाल, सब्सिडी की एकमुश्त राशि केंद्र सरकार संबंधित तेल कंपनियों को देती है।

बैंक खातों में आएगी केरोसिन की सब्सिडी
पायलट प्रोजेक्ट के तहत करेंगे शुरुआत
 मार्च से नीले केरोसिन पर डीबीटी लागू कर देंगे। इसकी शुरूआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जाएगी। इसके बाद सभी जिलों में नीले केरोसिन पर दी जाने वाली सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं के खातों में ट्रांसफर की जाएगी।  केसी गुप्ता, प्रमुख सचिव, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग

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