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निगम अफसरों ने ही दी थी मयूर हाॅस्पिटल को गलत परमिशन

5 वर्ष पहले
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आईडीए द्वारा लीज निरस्त करने के बाद हाई कोर्ट के स्टे पर चल रहे मयूर हाॅस्पिटल (रिंग रोड पर बंगाली चौराहे के पास) के मामले में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी नगर निगम ने भेज दी है। इसमें निगमायुक्त ने निगम के पुराने अफसरों पर ही सवाल खड़े कर दिए। रिपोर्ट में कहा कि 2001 में इस अस्पताल की बिल्डिंग परमिशन निगम के ही अफसरों ने गलत ढंग से दी। निगमायुक्त ने इसमें और भी कई कारण बताए हैं, जिनमें तत्कालीन कंट्रोलिंग अधिकारी (पहले सिटी इंजीनियर की जगह यह पद होता था) और तत्कालीन भवन अधिकारी को जिम्मेदार माना है।

रिपोर्ट के मुताबिक आईडीए ने स्कीम 94 सेक्टर-ई में प्लॉट नं. 304 ईई से 310 ईई और 316 ईई से 322 तक 14 प्लॉट आवासीय उपयोग के लिए अलग-अलग नाम से लीज पर दिए थे। इनमें से प्लॉट नं. 304 ईई के मालिक सनोवर रियाज सिद्दीकी के आवेदन पर आईडीए ने 7 अप्रैल 2000 को इन प्लॉटों के संयुक्तिकरण पर सहमति दी थी। इसमें शर्त थी कि इन प्लॉटों पर भवन निर्माण निगम के मास्टर व जोनल प्लान, जोनल रेगुलेशन या भूमि विकास नियमों के प्रावधानों के तहत हो। निगम ने 16 जून 2000 को लोअर ग्राउंड फ्लोर, अपर ग्राउंड फ्लोर प्लस थ्री की अनुमति जारी की थी। इसके बाद निगम ने 4 जनवरी 2001 को क्रिसेंट हॉस्पिटल प्रा.लि. के डॉ. मोहम्मद रियाज सिद्दीकी डायरेक्टर के नाम से पेंट हाउस की स्वीकृति भी दे दी थी। निगमायुक्त ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि निगम ने जो अनुमति दी, वह प्रावधानों के विपरीत है।

इन 14 प्लॉटों का संयुक्तिकरण सक्षम प्राधिकारी ने नहीं किया। आईडीए ने मात्र संयुक्तिकरण करने पर अनापत्ति दी। इसके बावजूद भवन बनाने की अनुमति दी गई।

आईडीए की अनापत्ति को सक्षम स्वीकृति मानकर निगम के तत्कालीन अधिकारी ने इसे एक संयुक्तिकरण प्लॉट (जो गलत है) माना।

इसी तरह संयुक्तिकरण प्लॉट पर आवासीय के बजाय चिकित्सालय के उपयोग की अनुमति दी, जो प्रावधानों के विपरीत है।

उस समय प्रभावशील मास्टर प्लान-1991 के प्रावधान के विपरीत हाॅस्पिटल की अनुमति दी, जबकि उक्त प्रावधान आवासीय जमीन पर प्रभावशील होते हैं।

निगम ने डॉ. मोहम्मद रियाज सिद्दीकी के नाम से अनुमति दी, जबकि वे 14 प्लॉटों में से किसी के मालिक नहीं हैं।

इस तरह हुई गड़बड़ी
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