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40 युवाओं ने लोगों को किया जागरूक, दो वार्ड दिखने लगे साफ-सुथरे

5 वर्ष पहले
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शहर के 40 युवाओं ने साल 2007 में पन्नी बीनने वाले परिवारों (रैग पीकर्स) के लिए काम शुरू किया। इसके लिए शहर की 14 बस्तियों को चुना और फिर उसमें से 1238 रैग पीकर्स को काम पर लगाया। उन्हें शिक्षा, ट्रेनिंग के अलावा सुरक्षा भी मुहैया करवाई। घर-घर कचरा संग्रहण के लिए एक संस्था बनाई और उसमें इनका सहयोग लिया। ग्रुप ने शहर के तीन वार्ड लिए। दो में काम भी शुरू कर दिया।

ग्रुप के प्रमुख गोपाल जगताप बताते हैं कि पहले दूसरी संस्था के साथ काम करते थे। फिर खुद की संस्था बेसिक्स बनाई। ग्रुप में 40 युवा हैं। सफाई को लेकर जागरूकता और घर-घर कचरा उठाने की कड़ी में काम शुरू किया तो इंदौर का शिवधाम हो या भोपाल की आकृति रिजेंसी, सभी जगह सराहना मिली। महेश्वर, ओरछा, राणापुर, सैलाना, नामली, चित्रकूट में भी काम किया। रैग पीकर्स की टीम बनाई और डोर-टु-डोर कचरा संग्रहण शुरू किया। नगर निगम के साथ जुड़कर संस्था ने पहले वार्डवार नक्शा बनाया। एक-एक गली, एक-एक घर की गणना की। फिर लोगों को समझाया, उन्हें प्रेरित भी किया कि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखें।

जगताप कहते हैं कि हमारे काम को देखते हुए नगर निगम ने हमें कचरा संग्रहण की परमिशन दी और कुछ संसाधन भी उपलब्ध करवाए। वार्ड 17, 29 और 33 का जिम्मा हमने लिया है। 17 और 33 में काम शुरू भी हो गया है। स्वच्छ भारत गान के साथ कचरा गाड़ी घूमती है। गीत सुनते ही लोग कचरा लेकर घर के बाहर आ जाते हैं। इसके साथ ही खाली प्लॉट, स्कूल, अस्पताल से कचरा उठाने के लिए अलग सिस्टम बनाया है।

अब स्वच्छ भारत के गान से कचरा लेकर बाहर आ जाते हैं लोग
रैग पीकर्स के लिए यह किया
संस्था ने 14 बस्तियों में रैग पीकर्स के लिए काम शुरू किया। इसमें राहुल गांधी नगर, बजरंगनगर, अन्ना भाऊ साठे नगर (चिकित्सक नगर), पंचशील नगर, सीपी शेखर नगर, सूर्यदेव नगर, अर्जुन नगर और बुद्ध नगर के कचरा बीनने वाले 1238 परिवारों पर फोकस किया। इनके बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया तो महिलाओं के बैंक अकाउंट खुलवाए। किशोरी और युवतियों को वोकेशनल ट्रेनिंग दी, ताकि वे कचरा बीनने की जगह सिलाई-कढ़ाई जैसे काम कर सकें। रैग पीकर्स के लिए कलेक्शन सेंटर खोले और 15-15 के ग्रुप बनाकर उनसे काम लिया।

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