हिंदू संगठनों का ऐलान- हमारी शर्त नहीं मानी तो पूजा बाहर ही
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भोजशाला से प्रशांत कालीधार और योगेश पंवार
हिन्दू जागरण मंच और भोज उत्सव समिति ने गुरुवार रात 10 बजे ऐलान किया कि शुक्रवार को भोजशाला के बाहर पूजा की जाएगी। इससे पहले दिनभर भाजपा और प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि समिति को भीतर पूजा करने के लिए मनाते रहे। हिन्दू संगठनों की अखंड पूजा की शर्त पर जब बात नहीं बनी तो समिति ने कह दिया कि सुबह तक का वक़्त शेष है। तब तक भी बात मान ली जाती है तो वसंतोत्सव भोजशाला के भीतर धूमधाम से मनाया जा सकता है। अन्यथा भोजशाला के इतिहास में पहली बार बाहर सड़क पर पूजा करने को मजबूर होना पड़ेगा। उधर, प्रशासन पूजा और नमाज दोनों कराने की तैयारी में है। एडीजी वििपन माहेश्वरी और संभागायुक्त संजय दुबे के अनुसार पूजा और नमाज दोनों निर्विवाद रूप से संपन्न हों, यह सुनिश्चित करेंगे।
इस सबके बीच धार के माहौल में अजीब सी बेचैनी है। भोजशाला परिसर और आसपास का इलाका छावनी में तब्दील है। चप्पे-चप्पे पर पैरा मिलिट्री और मिलिट्री के जवान हैं। पहली बार सुरक्षाबलों की 26 कंपनियां बुलाई गई हैं। 9 हजार से ज्यादा जवान सड़कों और गलियों में डटे हुए हैं। बावजूद इसके भोजशाला के भीतर पूजा और नमाज करवाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। हिंदू अखंड पूजा पर तो मुसलमान नमाज पर अड़े हैं। हिंदू जागरण मंच के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि 1952 में भोज उत्सव समिति का गठन हुआ था और तब से ही वसंत पंचमी की पूजा भोजशाला के गर्भगृह में होती आई है। शेष|पेज 6 पर
भोजशाला की वाग्देवी बनकर तैयार, ले जाने वाला कोई नहीं -पेज 4
हिन्दू संगठन भोजशाला के गर्भगृह में अखंड पूजा करना चाहते हैं। इसके लिए दोपहर में ही हवन कुंड को लीपने के बाद अक्षत-कुमकुम चढ़ाकर शुद्ध भी कर लिया गया था। शाम को भोजशाला सजाई जाना थी। वंदनवार, मालाएं और ध्वजाओं के साथ अन्य सामग्री भी भीतर भेजी गई लेकिन सूर्यास्त से ठीक पहले भोज उत्सव समिति ने सारी सामग्री वापस बुला ली। भोपाल (सरकार) से अखंड पूजा को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण समिति ने भीतर की तैयारी रोक दी। समिति ने साफ कहा है कि पूजा को इस बार खंडित नहीं होने देंगे। दूसरी तरफ मुस्लिम लोग जुमे की नमाज पर अड़े हैं। टकराव को देखते हुए प्रशासन ने भोजशाला और कमाल मौलाना दरगाह को 16 से 30 फ़ीट ऊंची टीन की चद्दरों की बेरिकेटिंग से कवर कर दिया है ताकि पूजापाठी और नमाजी एक-दूसरे को देखे बिना अपनी-अपनी भक्ति कर सकें।
यह संदेश जाएगा कि सरकार और प्रशासन दोनों पक्षों को समझाने में नाकाम रहे। भोजशाला विवाद में कड़वाहट और बढ़ जाएगी। हर साल के लिए पूजा बाहर या अंदर का सवाल खड़ा हो जाएगा। भाजपा को अपने ही लोगों का विरोध झेलना पड़ सकता है।
पूजा बाहर हुई तो...
पुरातत्व विभाग ने नहीं दिया जवाब, हाईकोर्ट के आदेश यथावत
इंदौर. हाईकोर्ट ने भोजशाला में कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर लगी याचिका पर जो निर्देश पहले दिए थे, वह यथावत रहेंगे। यानी पूजा और नमाज पुरातत्व विभाग के कार्यक्रम अनुसार होगी। इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर विभाग का जवाब तीन दिन में नहीं आया। याचिका अधिवक्ता मनीष यादव ने लगाई है। मुस्लिम समाज के दो व्यक्तियों ने भोजशाला में नमाज पढ़ने पर रोक की मांग की पिटिशन लगाई है, लेकिन केस सुनवाई के लिए नहीं आ पाया।
प्रशासन की तैयारी 2006 के फार्मूले वाली, यानी पूजा-नमाज दोनों
प्रशासन की तैयारी इस बार 2006 के फार्मूले के तहत पूजा और नमाज साथ-साथ करवाने की है। सूत्रों के मुताबिक भोजशाला की एक छत पर टेंट भी लगा दिया गया है। संभवतः यहीं नमाज होगी। नमाज के दौरान सरस्वती पूजन के मंत्रोच्चार की आवाज नमाजियों तक न पहुंचे इसलिए लाउडस्पीकर की आवाज बंद कर दी जाएगी। प्रशासन ने कमाल मौलाना की दरगाह के पास एक वैकल्पिक रास्ता तैयार कर रखा है। सब ठीक रहा तो इस हिस्से में नमाज पढाई जा सकती है।
पूजा अंदर या बाहर? सजावट के लिए भोजशाला में भेजे फूल समिति ने बाहर मंगवा लिए। फोटो : ओपी सोनी
अभी तक हमें यह आश्वासन नहीं मिला है कि पूजा को बीच में रोक नहीं जायेगा। इसलिए फिलहाल हमने निर्णय लिया है कि पूजन भोजशाला के बाहर करेंगे। पूजा शुरू होने से पहले हमारी मांग मानी जाती है तो फिर भोजशाला के भीतर उत्सव के साथ पूजन-हवन होगा। - विजयसिंह राठौर, संरक्षक भोज उत्सव समिति
अभी तक हमें आश्वासन नहीं मिला कि पूजा बीच में नहीं रोकेंगे