जब गुरु शिष्य को अपनाता है तभी से वह उसके साथ हो जाता है
जब गुरु शिष्य को अपनाता है तभी से वह उसके साथ हो जाता है
इंदौर। जब मानव शरीर मिल जाए तो इसे परमात्मा की दया मानकर जीवात्मा को बार-बार जन्म-मरण से मुक्त करने का कार्य करना चाहिए। कलियुग में ‘नाम’ के द्वारा ही जीवात्मा का कल्याण होगा। गुरु शब्द रूपी होता है। पूरी सृष्टि की रचना भी शब्द से हुई है। मनुष्य शरीर में विद्यमान चेतन शक्ति भी शब्द रूप में ही है। जिस दिन गुरु शिष्य को अपनाता है उसी दिन से वह शब्द रूप में उसके के साथ हो जाता है। ये बातें रविवार को तेजाजी नगर बायपास स्थित ग्राम मिर्जापुर आश्रम में दो दिनी पंचम स्थापना दिवस समारोह में जयपुर से आए प्रवचनकार रूपनारायण ने कही। आश्रम के अध्यक्ष चतरसिंह राजावत ने बताया सुबह सत्संगियों ने भजन, ध्यान और सुमिरन किया। सभी भक्तों ने बाबा जयगुरुदेव की प्रतिमा का पूजन किया। गैर सत्संगियों को शाकाहारी रहने का संकल्प दिलाया गया। सोमवार को भंडारा होगा।