इनकी रगों में दौड़ता है मदद का खून, 30 साल में 94 बार रक्तदान
52 वर्षीय डॉक्टर (डायबिटीज स्पेशलिस्ट) राजेश अग्रवाल 30 साल से रक्तदान कर रहे हैं। अब तक 94 बार खून देकर वह कई जिंदगियां बचा चुके हैं। उन्हें देख उनके परिवार के सदस्य भी खून डोनेट करने लगे। इस पहल से उनका बेटा इतना प्रभावित है कि अमेरिका में जॉब करने के बाद भी वह पिता के जन्मदिन पर रक्तदान कर तोहफा देता है और हर जन्मदिन पर यहां आता है।
डॉक्टर अग्रवाल बताते हैं कि 22 साल की उम्र में वे एमवाय अस्पताल में प्रैक्टिस करते थे। वहां मरीजों को खून की जरूरत पड़ती थी, लेकिन उस वक्त लोग खून देने में कतराते थे। मरीज के परिजन भी खून देने के लिए तैयार नहीं होते थे। इसके चलते कभी-कभी मरीज की जान तक चली जाती थी। इसी दौरान उन्होंने निश्चय किया था कि वे रक्तदान करेंगे।
अपनी और प|ी की बॉडी कर चुके हैं डोनेट
डॉ. अग्रवाल ने बताया वे जो कुछ भी हैं वह मेडिकल साइंस के कारण हैं इसलिए उन्होंने अपनी और प|ी रीना की बॉडी डोनेट कर दी है। साथ ही साथ उन्होंने अपने बच्चों को वह विभाग (एनोटॉमी) भी दिखाया, जहां उनकी मौत के बाद उनको रखा जाएगा।
जरूरत पड़ने पर परिवार भी देता है साथ
डॉ. अग्रवाल ने बताया उनके तीन छोटे भाई और घर की महिलाएं भी खून डोनेट कर चुकी हैं। वे और उनके परिवार वाले दिन हो या रात कभी भी जरूरत पड़ने पर रक्तदान करने चले जाते हैं। यही शिक्षा उन्होंने अपने बेटे रोमिल को भी दी है। 18 साल के बाद वह भी रक्तदान करने लगा है।
पिता के जन्मदिन पर यूएस से आकर करता है रक्तदान
डॉक्टर के बड़े बेटे रोमिल अमेरिका में पढ़ाई करते थे। उसके बाद उनका जॉब भी वहीं लग गया। मगर पढ़ाई और नौकरी के दौरान भी वह पिता के जन्मदिन पर बीते तीन साल से इंदौर आकर खून डोनेट कर रहे हैं। वे भी पिता की राह पर रक्तदान करने लगे है।
रक्तदान करते हुए डॉ. अग्रवाल व उनका बेटा।