घरों में खाना बनाने वाली आय से नहीं हो सकता जीवन-यापन : कोर्ट
इंदौर | कुटुंब न्यायालय ने एक प्रकरण में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि महिला घरों में खाना बनाकर होने वाली आय से जीवन-यापन नहीं कर सकती। इसलिए पति को उसे भरण-पोषण देना पड़ेगा।
मामला 16 वर्ष पूर्व ब्याही महिला व उसकी 11 वर्षीय बेटी का है। महिला का विवाह कमाठीपुरा के मनोज चौहान से हुआ था। बाद में उसे मानसिक यातना देते हुए घर से निकाल दिया। अधिवक्ता के.पी. माहेश्वरी के मुताबिक इसी बीच मनोज ने घर में काम करने वाली नाबालिग से दुष्कर्म किया। थाना सदरबाजार ने उसके खिलाफ केस कायम किया जिस पर वह जेल गया। जेल से छूटकर आया और फिर प|ी को ले गया किंतु फिर भी मारपीट करता रहा। मनोज ने कोर्ट में तर्क दिए कि महिला को भरण-पोषण का हक नहीं है, क्योंकि वह काम करती और स्वयं के भरण-पोषण के लिए सक्षम है। महिला की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिए कि वह वाल्मिकी समाज की है और घरों में खाना बनाती है जिससे इतनी आय नहीं होती कि स्वयं और 11 साल की पुत्री का भरण-पोषण कर सके। कोर्ट ने फैसले में कहा-घरों में खाना बनाने की आय से जीवन-यापन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मनोज को आदेश दिया कि वह भरण-पोषण के लिए प|ी को प्रतिमाह पांच हजार रुपए व पुत्री को तीन हजार रुपए दे।