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सीईटी फिर विवादों में, अभिभावकों ने किया हंगामा, ग्रुप सी की काउंसलिंग हुई निरस्त

4 वर्ष पहले
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देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठित सीईटी एक बार फिर विवादों में घिर गई। इस बार भी अलॉटमेंट में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। जिन छात्रों का प्रोविजनल लिस्ट में नाम था, वह अगले दिन गायब हो गया। शुक्रवार को इसे लेकर अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया। विवादों के चलते काउंसलिंग निरस्त करना पड़ी। इस मामले में विवि प्रबंधन ने सॉफ्टवेयर में हुई गड़बड़ी को जिम्मेदार बताया है। अब काउंसलिंग शनिवार को होगी।

इस बार काउंसलिंग का पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में है। क्योंकि, ग्रुप सी के जिन चार कोर्स की प्रोविजनल सूची गुरुवार को जारी हुई थी, शुक्रवार को उसमें से कई छात्रों के नाम गायब थे। जब छात्र दस्तावेज सत्यापन के लिए यूनिवर्सिटी के तक्षशिला परिसर पहुंचे तो पता चला कि उनका नाम ही नहीं है। जिस छात्रा का नाम 14 वें नंबर पर था, वह सूची से ही गायब हो गई। ऐसे कई केस सामने आए। इस कारण अभिभावकों का गुस्सा भड़का और उन्होंने विरोध और हंगामा शुरू कर दिया। इसी दौरान कुछ पूर्व छात्र नेता भी वहां पहुंच गए। हंगामे के बीच आखिरकर विवि प्रबंधन ने गलती स्वीकारी और काउंसलिंग निरस्त कर दी। इस पूरे मामले में प्रबंधन ने सॉफ्टवेयर में हुई गड़बड़ी को जिम्मेदार बताया है। जबकि अभिभावकों ने आरोप लगाया कि जानबूझकर कुछ को फायदा पहुंचाने के कारण गड़बड़ी की गई।

चेयरमैन बाेले - पारदर्शिता से समझौता नहीं, तकनीकी दिक्कत हुई

सीईटी कमेटी के चेयरमेन डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा। सिर्फ तकनीकी दिक्कत की वजह से कुछ छात्रों को गलतफहमी हुई कि उनके नाम हटाए गए हैं, जबकि ऐसा नहीं था। हंगामे के कारण छात्रों काे सही स्थिति नहीं बताई जा सकी। अब शनिवार को काउंसलिंग होगी, हमने सॉफ्टवेयर कंपनी से कहा है कि जिन छात्रों के के नाम हटे हैं, वह पात्र होने पर तत्काल दोबारा जोड़े जाएं।

दिनभर चला हंगामा, पुलिस भी पहुंची
विवि प्रबंधन ने सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी को बताया जिम्मेदार
ग्रुप सी में बी फॉर्मा, एमसीए, एमटेक और एमबीए(एचए-5 ईयर) कोर्स शामिल हैं। कुछ छात्रों के नाम लिस्ट में नहीं होने से विवाद शुरू हुआ। हालांकि, एसजेएमसी में चल रही काउंसलिंग में शामिल प्रोफेसरों ने कहा कि यह तकनीकी गड़बड़ और च्वाइस फिलिंग में बदलाव के चलते हुआ है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों का हंगामा जारी रहा।

फोरेंसिक ऑडिट से ही सामने आएगा सीईटी का सच
सीईटी में इतने बार मेरिट बदल चुकी है कि परिणाम की विश्वसनीयता ही संदेह के दायरे में आ चुकी है। छात्र जहां प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं डीएवीवी के जिम्मेदार किसी भी गड़बड़ी को सिरे से नकार रहे हैं। सवाल उठता है कि जब गड़बड़ी नहीं तो मैरिट क्यों बदल रही है। इन सवालों का जवाब छिपा है पूरी ऑनलाइन परीक्षा के फोरेंसिक ऑडिट में। इस ऑडिट से ही यह पूरी तरह साफ हो सकेगा कि गड़बड़ी हुई है या नहीं और किसने की। 28-29 जून को हुई परीक्षा का परिणाम जुलाई की शुरुआत में आ गया था लेकिन तब से अब तक मेरिट लिस्ट तीन बार बदली जा चुकी है। म.प्र. लोकसेवा आयोग ने जब ऑनलाइन परीक्षा शुरू की तो उसने भी बेंगलुरु की ट्रूथ लैब से फोरेंसिक ऑडिट करवाया था। मामले में सीईटी प्रभारी जयंत सोनवलकर का कहना है कि निश्चित ही फोरेंसिक ऑडिट से सबकुछ साफ होगा। हमारे पास काफी लॉग शीट आ भी गई हैं। कोई गड़बड़ नहीं है। ऑडिट का निर्णय तो वरिष्ठ अधिकारी ले सकेंगे।

अलॉटमेंट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए छात्र और अभिभावकों ने हंगामा कर दिया।

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