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क्यों न उम्रकैद की सजा फांसी में बदल दी जाए : हाई कोर्ट

5 वर्ष पहले
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धार के कांग्रेस नेता कैलाश अग्रवाल और ड्राइवर दिनेश मकवाना के सात हत्यारों को हाई कोर्ट ने शोकॉज नोटिस जारी किया है। जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे इन हत्यारों और दो दोषमुक्त आरोपियों को फांसी की सजा देने के लिए कोर्ट में दो याचिकाएं लगी हैं। इन्हीं को लेकर कोर्ट ने नोटिस में हत्यारों से पूछा है कि क्यों न याचिकाएं स्वीकार कर आपको फांसी की सजा दी जाए। राज्य शासन से भी जवाब मांगा है। हत्यारों में धार जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालमुकुंद सिंह गौतम का छोटा भाई राकेश गौतम भी है। धार जिला कोर्ट ने 14 दिसंबर को सात आरोपियों को दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

उम्रकैद के फैसले के खिलाफ कैलाश अग्रवाल की प|ी उमा की ओर से अधिवक्ता अविनाश सिरपुरकर ने हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में दो याचिकाएं दायर की हैं। एक याचिका में कहा गया है कि सात आरोपियों की सजा फांसी में तब्दील की जाए। दूसरी याचिका में कहा गया कि जिन दो आरोपियों को दोषमुक्त किया गया, उन्हें भी फांसी की सजा सुनाई जाए।









दोनों याचिकाओं में राज्य शासन को भी पार्टी बनाया गया है। जस्टिस शुभदा वाघमारे और जस्टिस आलोक वर्मा की डबल बेंच में हुई सुनवाई में अधिवक्ता सिरपुरकर ने तथ्य रखे कि आरोपियों ने नृशंस तरीके से गर्दन काटकर अलग की। डीएनए टेस्ट, हड्डियों की जांच, अनुसंधान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य से सिद्ध हुआ है कि घटना वीभत्स तरीके से की गई, जो विरल से विरलतम श्रेणी में आती है। इस पर कोर्ट ने सभी नौ आरोपियों को नोटिस जारी किया।

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