रूचि बुंदेला, सहेंद्र सिंह दिखित
बा त 2011 की है। मैं इंदौर में होस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। चौथे सेमेस्टर में बिज़नेस स्टडीज़ का असाइनमेंट मिला। उसे पूरा करने में मुझे कठिनाई हो रही थी। मेरी रूममेट ने मुझे उसके बिज़नेसमैन दोस्त सहेंद्र से मिलवाया। वो हमारी पहली मुलाकात थी। उन्होंने मेरा पूरा असाइनमेंट ही बना दिया। यहीं से हमारी बातचीत शुरू हुई। एक महीने बाद वैलेंटाइन डे पर ये मेरी तबीयत देखने आए और मुझे चाय पिलाने दुकान पर ले गए। चाय का कप हाथों में पकड़े हुए ही उन्होंने मुझे प्रपोज़ किया। मेरे लिए चाय की दुकान पर किया गया यह प्रप्रोज बड़ा अजीब था। बगैर जवाब दिए मैं वहां से चली आई। छुट्टियों में जब घर आई तब मुझे उनकी याद आने लगी। इंदौर आते ही मैंने उन्हें उसी चाय की दुकान पर बुलवाया। और फिर उन्हीं के अंदाज में शादी के लिए हां कर दी।
चाय की दुकान से शुरू हुई हमारी प्रेम कहानी