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ऐसा पौधा, जिससे किडनी के रोगों का इलाज संभव

5 वर्ष पहले
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आस्था का प्रतीक बोधि वृक्ष
वन विभाग की नर्सरी में दो दुर्लभ पौधे आए हैं। इन्हें वन मेले में प्रदर्शित भी किया गया है। इनमें एक बोधि वृक्ष (पौधा) है, जिसके नीचे बैठ भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। वहीं दूसरा किडनी के रोग में कारगर काशनी का पौधा है। इसकी पत्ती चबाने से बीमारी में राहत मिलती है।

बोधि वृक्ष को फिलहाल नवरतनबाग स्थित परिसर में ही लगाया जाएगा। इसके अलावा शहर के प्रमुख स्थलों पर भी यह सुरक्षित तरीके से लगेगा। वन संरक्षक वीके वर्मा के मुताबिक काशनी के पौधे के लिए काफी डिमांड आ रही है। वन मेले में भी इसकी काफी पूछपरख हुई। आयुर्वेदिक दवाई बनाने वाली कंपनियों ने भी इस पौधे के लिए करार किए हैं। इसकी पत्ती का पाउडर बनाकर बाजार में लाया जा जाएगा। इस पौधे को घर में भी लगाया जा सकता है। विभाग की नवरतनबाग स्थित नर्सरी में थैलियों में पौधे तैयार किए गए हैं। इन्हें करीब आधा फीट का तैयार किया गया है। ताकि लोगों को घर ले जाने के बाद परेशानी नहीं आए।

नवरतनबाग की नर्सरी में काशनी का पौधा, जिससे किडनी संबंधी रोगों का इलाज संभव बताया जा रहा।

बोधि धर्म के अनुयायियों के लिए बोधि वृक्ष आस्था का प्रतीक है। बोधगया में उस वृक्ष के दर्शन किए जाते हैं जहां पर भगवान बुद्ध बैठे थे। विभाग कोशिश में है कि ऐसे वृक्षों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि शहर में सार्वजनिक स्थलों पर इन्हें लगाया जा सके। विभाग को मिला नर्सरी में ही लगाया जाएगा। इस पौधे के तीन फीट का होने तक गमले में ही रखा जाएगा। इसके बाद ट्री गार्ड लगाकर जमीन में रोपा जाएगा। गांधी हॉल, रेसीडेंसी कोठी जैसे स्थानों पर भी यह पौधा लगाया जाएगा।

वन विभाग की नर्सरी
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