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इस किले की खुदाई में निकली जेल, यहां 'ब्रह्मास्त्रधारी' करता है पहली शिव पूजा

5 वर्ष पहले
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बुरहानपुर/इंदौर. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से 20 किमी दूर असीरगढ़ किले में खुदाई में जेल निकली है। जेल में 4 बैरक हैं। खुदाई में एक रानी का महल भी निकला है। क्यों चर्चित है ये किला...
-पुरातत्व विभाग के सहायक संरक्षक राकेश शेंडे के मुताबिक 1857 में इस जेल में जिन तीन क्रांतिकारियों को फांसी पर चढ़ाया गया था वे कूमा प्रजाति के थे।
-क्रांतिकारी रूर सिंह, पहाड़ासिंह, मुलुक सिंह को असीरगढ़ में बंदी बनाकर रखा गया था।
-फांसी से पहले और फांसी के बाद मेडिकल हुआ था। पुरातत्व विभाग के पास कैद करने के आदेश, मेडिकल के दस्तावेज उपलब्ध हैं।
- यह सभी दस्तावेज पुरातत्व विभाग को राष्ट्रीय अभिलेखागार भोपाल में मिले हैं।
तीन साल पहले क्रांतिकारियों के परिजन ने सौंपा था नक्शा
-असीरगढ़ पर तीन महीने पहले खुदाई हुई थी। इसमें जेल निकली।
-जेल में लोहे की खिड़की, दरवाजे मिले हैं। चार बैरक बने हुए हैं।
-तीन साल पहले पंजाब के भटिंडा से क्रांतिकारियों के परिजन बुरहानपुर आए थे। वे सन् 1818 का नक्शा लेकर आए थे।
-इसमें उन्होंने बताया था कि किले पर जेल भी है। इस पर पुरातत्व विभाग ने खुदाई करवाई। नक्शा पुरातत्व संरक्षण अधिकारी राकेश शेंडे को सौंपा।
रानी के महल में बने हैं अंडरग्राउंड कमरे
-पुरातत्व विभाग की खुदाई में एक रानी का महल भी निकला है। इस महल में अंडरग्राउंड 20 कमरे हैं।
-पूरा महल 100 बाय 100 में बना हुआ है। महल ईंटों की जुड़ाई से बना हुआ है। महल 20 फीट गहराई तक बना हुआ है।
- इसमें स्वीमिंग पूल है। पुरातत्व विभाग ने महल की सफाई करवाई है।
यहां दिखाई देते हैं अश्वत्थामा
-मध्य प्रदेश के बुरहानपुर शहर से 20 किलोमीटर दूर एक किला है। इसे असीरगढ़ का किला कहते हैं।
-इस किले में भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है। यहां के रहने वाले लोगों का कहना है कि अश्वत्थामा प्रतिदिन इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने आते हैं।
-कुछ लोग तो यह दावा भी करते हैं कि उन्होंने अश्वत्थामा को देखा है, लेकिन इस दावे पर में कितनी सच्चाई है, इस पर संदेह है।
सबसे पहले पूजा करते हैं अश्वत्थामा
-मान्यता है कि असीरगढ़ के किले में स्थित तालाब में स्नान करके अश्वत्थामा शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।
-आश्चर्य कि बात यह है कि पहाड़ की चोटी पर बने किले में स्थित यह तालाब बुरहानपुर की तपती गरमी में भी कभी सूखता नहीं।
-तालाब के थोड़ा आगे गुप्तेश्वर महादेव का मंदिर है। मंदिर चारों तरफ से खाइयों से घिरा है।
सबसे पहले अश्वत्थामा ही इस मंदिर में आकर करते हैं भगवान शिव की पूजा
-मान्यता है कि इन्हीं खाइयों में से किसी एक में गुप्त रास्ता बना हुआ है, जो खांडव वन (खंडवा जिला) से होता हुआ सीधे इस मंदिर में निकलता है।
-इसी रास्ते से होते हुए अश्वत्थामा मंदिर के अंदर आते हैं।
-स्थानीय रहवासियों का दावा है सुबह सबसे पहले अश्वत्थामा ही इस मंदिर में आकर भगवान शिव की पूजा करते हैं।
इस तरह पहुंच सकते हैं किले पर
-असीरगढ़ किला बुरहानपुर से लगभग 20 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा में सतपुड़ा पहाडिय़ों के शिखर पर समुद्र सतह से 750 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।
-बुरहानपुर खंडवा से लगभग 80 किमी दूर है। यहां से बुरहारनपुर तक जाने के लिए ट्रेन, बसें व टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं।
-यहां से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है, जो करीब 180 किमी दूर है। बुरहानपुर मध्य प्रदेश के सभी बड़े शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा है।
आगे की स्लाइड्स में देखें, किले के फोटो...
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