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बचपन में पेड़ के नीचे बैठकर की कमेंट्री, अब मिला पदमश्री अवार्ड

सोमवार को इंदौर के सुशील दोशी और भालू मोंढे को पद्मश्री देने की घोषणा हुई। सुशील दोशी ने रेडियाे पर हिंदी क्रिकेट कमेंट्री को लोकप्रिय किया और भालू मोंढे ने फोटोग्राफी से लेकर पेटिंग्स में नए प्रयोग किए और हर जोखिम उठाकर अपनी क्रियेटविटी को नया आयाम दिया।

Dainik Bhaskar

Jan 26, 2016, 04:26 AM IST
मोंढे ने मालवा के दिग्गजों को तस्वीर में कुछ यूं दिखाया। मोंढे ने मालवा के दिग्गजों को तस्वीर में कुछ यूं दिखाया।
इंदौर. सोमवार को इंदौर के सुशील दोशी और भालू मोंढे को पद्मश्री देने की घोषणा हुई। सुशील दोशी ने रेडियाे पर हिंदी क्रिकेट कमेंट्री को लोकप्रिय किया और भालू मोंढे ने फोटोग्राफी से लेकर पेटिंग्स में नए प्रयोग किए और हर जोखिम उठाकर अपनी क्रियेटविटी को नया आयाम दिया।
बोलते कम, अपने काम से दूसरों को प्रेरित
जाने-माने पेंटर-फोटोग्राफर भालू मोंढे कहते हैं कि इंदौर के ख्यात पेंटर एन.एस. बेंद्रे के साथ मैं मुंबई में उनके घर तीन महीने रहा। उनके चित्रों की फोटोग्राफी की। वे बोलते कम थे और अपने काम से दूसरों को प्रेरित करते थे। मैंने उनसे जाना का पेंटिंग के लिए अनुशासन कितना ज़रूरी है। वे रोज़ बिना नागा सुबह 9 बजे पेंटिंग शुरू करते और दोपहर एक-दो बजे तक करते रहे। इस दौरान पूरी तरह उनका ध्यान पेंटिंग में लगा रहता था। ऐसी एकाग्रता मैंने अन्यत्र नहीं देखी। मैंने भी काम करते हुए कला के मर्म का जाना और समझा।
फोटोग्राफी और पेंटिंग्स में तो अनूठा काम
भालू मोंढे ने फोटोग्राफी और पेंटिंग्स में तो अनूठा काम किया ही है लेकिन द नेचर वालंटियर्स के जरिए सिरपुर तालाब को लेकर काम किया है वह कम महत्वपूर्ण नहीं है। वहां के पंछियों की उनकी फोटोग्राफी बहुत अच्छी है।
सुबंधु दुबे, ख्यात फोटोग्राफर
कमेंट्री के लिए थी मन में दिवानगी
हिंदी के ख्यात क्रिकेट कमेंटेटर सुशील दोशी का कहना है कि क्रिकेट और उसकी कमेंट्री के लिए मेरे मन में दीवानगी थी। इसी के चलते 14 साल की उम्र में मेरे पिता मुझे ब्रेबोर्न स्टेडियम में क्रिकेट मैच दिखाने ले गए। वहां से मैंने कमेंट्री बॉक्स देखा, तो सोचा मैं कब उस बॉक्स में बैठकर कमेंट्री करूंगा। और 1972 में मैंने इसी स्टेडियम के कमेंट्री बॉक्स में बैठकर भारत-इंग्लैंड के क्रिकेट टेस्ट मैच की कमेंट्री की। तब टोनी लुइस इंग्लैंड के कैप्टन बनकर आए थे।
जॉन आर्लोट और ब्रायन जॉन्स्टन से बहुत सीखा
वे कहते हैं कि यह सब अचानक नहीं हुआ। बचपन से मैं अपने स्कूल के मैदान पर पेड़ के नीचे बैठकर मैच की कमेंट्री करता था। उन दिनों मैं इंग्लैंड के जॉन आर्लोट और ब्रायन जॉन्स्टन की क्रिकेट कमेंट्री से बहुत प्रभावित था। मैंने उनसे सीखा कि कैसे आवाज़ की कलाकारी से कैसे क्रिकेट का रोमांच पैदा किया जा सकता है। सही जगह पर सही शब्द को बोलकर तुरंत वाक्य बनाना मैंने उन्हीं से सीखा।
कमेंट्री की लय, बहुत अच्छी हिंदी
रेडियो पर सुशील दोशी की कमेंट्री की लय, बहुत अच्छी हिंदी और उसकी शब्दावली पर उनका अच्छा अधिकार है। उन्होंने क्रिकेट जानने वालों और न जानने वालों के लिए एक संतुलित कमेंट्री की शैली ईजाद की।
संजय जगदाले, एमपीसीए के अध्यक्ष
आगे की स्लाइड्स में देखें फोटो..
भालू मोंढे। भालू मोंढे।
सुशील दोशी। सुशील दोशी।
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मोंढे ने मालवा के दिग्गजों को तस्वीर में कुछ यूं दिखाया।मोंढे ने मालवा के दिग्गजों को तस्वीर में कुछ यूं दिखाया।
भालू मोंढे।भालू मोंढे।
सुशील दोशी।सुशील दोशी।
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