इंदौर. यह है बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स की सेंट्रल शूटिंग टीम। इस टीम के कुछ बेहतरीन शूटर्स जिन्होंने पिछले साल 44 गोल्ड सहित कुल 116 मेडल जीते हैं, वे इन दिनों शहर में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
इनमें कुछ फीमेल शूटर्स भी हैं। हालांकि खास यह नहीं है कि ये लड़कियां हैं और शूटिंग में बेहतरीन परिणाम दे रही हैं। खास है विषम परिस्थितियों में भी इनका कड़ा संघर्ष और बेहतरीन परिणाम। शूटिंग प्रतियोगिता में किसी भी टीम ने अब तक इतने मेडल्स नहीं जीते हैं। मक़सद यही बताना है कि समर्पण बनाए रखना और लगातार संघर्ष करना कठिन तो है, लेकिन यही हमारा हाथ थामे हमें जीत तक ले जाता है। टीम के कोच, सेकंड इन कमांड नवल सिंह की ज़ुबानी सुनिए संघर्ष से जीत की तीन कहानियां।
चूड़ियां बाधा नहीं बनती लक्ष्य साधने में
पिस्टल शूटर बलजिंदर कौर। हाल ही मे इनकी शादी हुई है और हाथों में अभी शगुन का चूड़ा भी है। सितंबर 2015 में ऑल इंडिया पुलिस स्पोर्ट्स शूटिंग चैम्पियनशिप में सेंट्रल शूटिंग टीम ने अब तक के सर्वाधिक 33 गोल्ड हासिल किए। इनमें से एक गोल्ड बलजिंदर ने दिलवाया था।
ध्यान और प्राणायाम से तैयारी
कोच नवल सिंह ने बताया कि खिलाड़ी जब पहले से मंझे हुए हों तो कोच की ज़िम्मेदार और भी बढ़ जाती है। मेरा काम सभी को फिज़िकली और मेंटली फिट रखना है। इसके लिए सुबह 1 घंटा एक्सरसाइज़ के बाद 1 घंटा प्राणायाम और ध्यान करवाते हैं। इससे शॉट के समय खिलाड़ी सांस पर नियंत्रण रख पाते हैं। सांस लेने या छोड़ने पर रिब केज हिलता है। असर हाथ पर भी आता है और निशाना चूक जाता है।
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