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संस्कृत में बनाना चाहते हैं साइंस फिक्शन, बनाई है देश की तीसरी फिल्म

666 डॉक्यूमेंटरी और फिल्मों के निर्माता और 2 नेशनल, 7 स्टेट अवॉर्ड जीत चुके निर्देशक विनोद मांकर ।

Dainik Bhaskar

Feb 29, 2016, 06:10 AM IST
ख्यात मलयाली फिल्म निर्देशक व ख्यात मलयाली फिल्म निर्देशक व
इंदौर. ख्यात मलयाली फिल्म निर्देशक विनोद मांकर कहते हैं कि मैंने देश की तीसरी संस्कृत फिल्म प्रियमानसम् बनाई। संस्कृत भाषा में 22 साल बाद कोई फिल्म बनी थी। इसके पहले महान फिल्मकार जीवी अय्यर, भगवदगीता और शंकराचार्य फिल्म बना चुके थे।
मेरी इस फिल्म की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फिल्म केरल को छोड़ देश के सभी भागों में होने वाले फिल्म फेस्टिवल्स में ओपनिंग फिल्म बन गई। कांस फिल्म फेस्टिवल 2015 में भारत की यह ऑफिशियल एंट्री थी लेकिन मेरे गृहप्रदेश में ही इसका सर्वाधिक विरोध हुआ। लेकिन मैं अब संस्कृत में साइंस फिक्शन बनाना चाहता हूं। वे चित्र-भारती फिल्म फेस्टिवल में शिरकत करने आए थे।
कला में ही संभव है भाषा का पुनर्जीवन
शुरुआत में लगता था कि संस्कृत में फिल्म को दर्शक नहीं समझ सकेंगे। बाद में पता चला कि भारत में ही सात गांव ऐसे हैं जहां पूरी जीवनशैली और बोलचाल संस्कृत में है। जर्मनी में तो 15 यूनिवर्सिटीज़ मेंं संस्कृत पढ़ाई जाती है। पैशन ऑफ क्राइस्ट फिल्म अरामिक भाषा में बनी थी। यह भाषा ईसा मसीह की मातृभाषा कही जाती है। इसको जानने वाले दुनियां में महज 25 परिवार ही हैं लेकिन किसी भाषा का पुनर्जीवन कला से ही संभव है। यही वजह थी कि मैने प्रियमानसम् की रचना की।
जो सिनेमा नही जानते वे तय करते है भविष्य
सिटी भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि मेरी फिल्म का विरोध करने के पीछे संकुचित विचारधारा थी। विरोध करने वाले वे लोग थे जो संस्कृत को मृत भाषा करार देते हैं। जबकि यह सर्वाधिक लाइव, म्यूज़िकल और साइंटिफिक लैंग्वेज है। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरला (आईएफएफके) के लिए पहली बार सब स्टेंडर्ड जूरी में ऐसे लोग थे जो सिनेमा से जुड़े नहीं थे। एक संकीर्ण मानसिकता और विचारधारा के इन लोगों को संस्कृत में बनी फिल्म रास नहीं आई। इसे लेकर अनावश्यक विवाद पैदा किया गया। दु:ख की बात है कि जब फिल्म का विरोध हो रहा था, तब यूरोप और यूके जैसे देशों से फिल्म को आमंत्रित किया जा रहा था। मैं संस्कृत में साइंस फिक्शन फिल्म बनाना चाहता हूं।
दुनिया को बताना चाहता हूं कि संस्कृत सिर्फ पूजा-पाठ या मंत्रोच्चार की भाषा भर नहीं है। इसमें हर जॉनर की फिल्म बनाई जा सकती है और हर तरह के संवाद लिखे जा सकते हैं। मेरी इस फिल्म में नासा जैसे किसी संगठन के इर्द-गिर्द कथानक बुना जाएगा जिसमें वैज्ञानिक संस्कृत में विज्ञान की फंतासी व्यक्त करेंगे।
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ख्यात मलयाली फिल्म निर्देशक वख्यात मलयाली फिल्म निर्देशक व
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