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पीएचडी गाइड बनेंगे IIM और IIT के प्रोफेसर, एमओयू में तय होंगी शर्तें

5 वर्ष पहले
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इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने की तैयारी कर रहे शोधार्थियों के लिए अच्छी खबर। वे न केवल आरआर कैट, आईआईएम और आईआईटी इंदौर, राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र और अन्य बड़े शोध संस्थानों के वैज्ञानिक, प्रोफेसर व विशेषज्ञों को अपना पीएचडी गाइड बना सकेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इन संस्थानों में रिसर्च भी कर सकेंगे।
 
यूनिवर्सिटी प्रबंधन शहर के उन तमाम शोध संस्थानों के साथ एमओयू साइन करने जा रहा है, जहां अत्याधुनिक स्तर की रिसर्च लैब है। यूनिवर्सिटी इन संस्थानों के वैज्ञानिक और प्रोफेसरों को रिसर्च गाइड भी बनाएगी। इसके लिए एमओयू में शर्तें तय होंगी। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। 
 
50 से ज्यादा नए गाइड मिलने की उम्मीद 
यूनिवर्सिटी प्रबंधन की तैयारी है कि इन संस्थानों से कम से कम 50 वैज्ञानिक या प्रोफेसरों को गाइड बनने के लिए राजी किया जाए। पीएचडी सेल के प्रभारी डॉ. गणेश कावड़िया का कहना है कि हमने इस मामले में प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद है कि परिणाम अच्छे होंगे। इस साल दो माह के भीतर होने वाली पीएचडी प्रवेश परीक्षा के पहले ही एमओयू साइन हो जाएं, ऐसा प्रयास किया जाएगा। डीएवीवी से हर साल लगभग 600 शोधार्थी पीएचडी करते हैं। इनमें से लगभग 50 छात्रों को इंटरनेशनल लेवल की लैब व अन्य सुविधाएं और नए गाइड का मार्गदर्शन मिलना तय है। 
 
15 फरवरी तक दें खाली सीटों की जानकारी
इधर, यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने 15 फरवरी तक सभी गाइड से खाली सीटाें की जानकारी मांगी है। यह जानकारी मिलते ही यूनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षा संबंधी विज्ञापन जारी करेगी। दरअसल, खाली सीटों की जानकारी के बाद ही पता चलेगा कि मैनेजमेंट, कॉमर्स, साइंस सहित तमाम स्ट्रीम में कितने छात्र पीएचडी कर सकेंगे।
 
मार्च अंत तक हो सकती है पीएचडी की प्रवेश परीक्षा
हम रिसर्च को लेकर बड़े स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। खास बात यह है कि हम अपना दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इसका फायदा सैकड़ों पीएचडी स्कॉलर को मिलेगा। मार्च अंत तक पीएचडी प्रवेश परीक्षा होने की संभावना है। जल्द इस पर निर्णय लेंगे। फिलहाल कई बड़े संस्थानों से चर्चा चल रही है। 
- डॉ. नरेंद्र धाकड़, कुलपति, डीएवीवी
 
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