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कुमार विश्वास ने चुटीले अंदाज़ में घोला बतकही का रस, कहा- मैं एलिट नहीं होना चाहता

उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं मुझमें मेरा कस्बाई बच्चा जिंदा रहे। मैं एलिट नहीं होना चाहता। मेरा बारे में कहा जाता है कि क्या ये भी कोई कवि है।

Dainik Bhaskar

Dec 18, 2016, 07:27 AM IST
इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल में बातचीत करते कुमार विश्वास। इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल में बातचीत करते कुमार विश्वास।
इंदौर. इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल में शनिवार को सुबह ख्यात अभिनेता-गीतकार पीयूष मिश्रा और शाम को ख्यात गीतकार कुमार विश्वास ने कविताएं सुनाई। इन कविताओं में इश्क-मोहब्बत की गहरी बातें थी, मासूम ख्वाबों और ख्वाहिशों की एक पूरी भरी-पूूरी और धड़कती दुनिया थी। इन कविता में विचलित करने वाला यथार्थ भी था तो दिल को छू जाने वाले मोहब्बत के ज़ज़्बात भी थे। इनमें सुंदर शब्दों के साथ ही भावों की प्रभावी अभिव्यक्ति भी थी। कुमार विश्वास ने बातचीत में कविता पर विचार व्यक्त किए। रोचक चुटीले अंदाज़ में बतकही का रस घोला...
 
 
उनकी बातों में रस था, उनकी कविता में रस था। बातों में कहीं हास्य का पुट था तो कविता में सुंदर बिम्बों-प्रतीकों का उपयोग था। हिंदी के गीतकारों और गीत परंपरा से अथाह प्रेम था तो अपनी काव्य यात्रा के अनुभवों को साझा करने का बेबाक तरीका भी था। गीतकार मनोज मुंतशिर से बातचीत में उन्होंने बहुत रोचक चुटीले अंदाज़ में बतकही का रस घोला। 
 
संवेदनाएं पक जाने पर ही लिखूंगा कविता 
 
- उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं मुझमें मेरा कस्बाई बच्चा जिंदा रहे। मैं एलिट नहीं होना चाहता। मेरा बारे में कई बातें कही जाती है कि क्या ये भी कोई कवि है।
- मेरी कोशिश है कि आज मैं जिस मुकाम पर हूं पर उसे जस्टिफाई करने के लिए श्रेष्ठ कविताएं लिख सकूं। कोशिश जारी है, लेकिन मैं तभी लिखना चाहता हूं जब मुझमें संवेदनाएं पूरी तरह से पक जाएं।
 
समोसे में आलू जैसे गीत मैं कभी नहीं लिखना चाहता
 
- मैं इंग्लिश पोएट जॉन डन से लेकर कीट्स, कालीदास-तुलसी से लेकर बाबा नागार्जुन और ज्ञानेंद्रपति जैसे कवियों को बहुुत पसंद करता हूं।
- मैं गीतकारों में रमानाथ अवस्थी से लेकर सोम ठाकुर को पसंद करता हूं। मैंने कई कवियों के सान्निध्य में रहकर कविता की खूबियां जानी और सीखी हैं।
- मैं अच्छी कविताएं लिखना चाहता हूं और इसलिए बॉलीवुड में जाकर गीत नहीं लिखना चाहता।
- 'जब तक रहेगा समोसे में आलू' जैसे गीत मैं कभी नहीं लिखना चाहता। मेरी कोशिश है कि मैं अच्छी कविताएं लिख सकूं। इसके बाद उन्होंने अपनी लोकप्रिय रचनाएं सुनाई ... 
 
तुम जिस शय्या पर शयन करो, वह क्षीर सिन्धु सी पावन हो
जिस आंगन की हो मौलश्री, वह आंगन क्या वृंदावन हो
जिन अधरों का चुम्बन पाओ  वे अधर नहीं गंगातट हों  
जिसकी छाया बन साथ रहो  वह व्यक्ति नहीं वंशीवट हो
पर मैं वट जैसा सघन छाँह विस्तार नहीं दे पाऊंगा... 
कुमार विश्वास ने अपनी लोकप्रिय रचनाएं भी सुनाई। कुमार विश्वास ने अपनी लोकप्रिय रचनाएं भी सुनाई।
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इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल में बातचीत करते कुमार विश्वास।इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल में बातचीत करते कुमार विश्वास।
कुमार विश्वास ने अपनी लोकप्रिय रचनाएं भी सुनाई।कुमार विश्वास ने अपनी लोकप्रिय रचनाएं भी सुनाई।
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