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घर-गहने बेचकर फतह किया एवरेस्ट, 21 की उम्र में बने देश के सबसे छोटे पर्वतारोही

Dainik Bhaskar

May 22, 2017, 12:59 AM IST

पैसे फिर भी कम पड़े तो दोस्तों और पड़ोसियों से उधार लिए। नॉर्थ ट्रेक से चढ़ाई करने वाले वे देश के दूसरे सबसे कम उम्र के पर्वताराेही बन चुके हैं।

पर्वतारोही मधुसूदन पाटीदार। पर्वतारोही मधुसूदन पाटीदार।
इंदौर. शहर के 21 साल के मधुसूदन पाटीदार ने अपने हौसले से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल की। एवरेस्ट फतह के लिए उन्हें 35 लाख रुपए की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने घर बेचा और अपनी मां के गहने भी। फिर भी पैसे कम पड़े तो दोस्तों और पड़ोसियों से उधार लिए। नॉर्थ ट्रैक से चढ़ाई करने वाले वे देश के सबसे कम उम्र के पर्वताराेही बन चुके हैं। पिता और मां ने किया सपोर्ट...
- समिट के लिए मधुसूदन को करीब 35 लाख रुपए अरेंज करने थे। इसके लिए उन्होंने इंदौर का अपना मकान बेचा और 17 लाख रुपए जुटाए। शेष पैसों के लिए उनकी मां ने अपने गहने भी बेच दिए। गुजरात में रहने वाली बहन ने भी मदद की।
- इतनी कोशिशों के बाद भी जब पैसे पूरे नहीं हुए तो दोस्तों और पड़ोसियों ने उनके जज्बे को देखते हुए रकम जुटाई।
- मधुसूदन के दोस्त शिवा डिंगू ने बताया कि उसके पापा साधारण-सी नौकरी (मोटरबाइंडिंग) करते हैं। उनकी सादगी इस कदर है कि बेटा माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए जा रहा था और वे नौकरी कर रहे थे। एयरपोर्ट पर छोड़ने के लिए दोस्त ही गए थे।
पैसे के लिए पीएमओ तक लगाई गुहार, आखिर में लेना पड़ा उधार
- मधुसूदन ने रविवार को ही एवरेस्ट फतह किया है और वे अभी शहर लौटे नहीं हैं।
- मधुसूदन के मोटिवेटर योगेंद्र देशमुख बताते हैं कि 6 सालों से वो एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए कोशिश कर रहा था।
- पहलगाम और देहरादून से बेसिक और एडवांस माउंटेनियरिंग की ट्रेनिंग लेने के बाद इस बार मधुसूदन ने चढ़ाई की। इसके लिए उसने तिब्बत की ओर से नॉर्थ ट्रैक को चुना जो ज्यादा मुश्किल है।
- 21 साल की उम्र में ये अचीवमेंट हासिल करने के बाद वो देश को दूसरा यंगेस्ट माउंटेनियर बन गया है।
- प्रदेश में भी इससे पहले किसी ने इतनी कम उम्र में एवरेस्ट पर चढ़ाई नहीं की है।
बहन को उम्मीद, पैसा मिलेगा जिससे उधारी चुका सकेंगे
- लिस्ट में नाम आने के बाद मधुसूदन ने खेल विभाग, स्पीकर सुमित्रा महाजन, बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, सीएम हेल्पलाइन और पीएमओ तक एप्लिकेशन दी, लेकिन मदद नहीं मिली।
- मधुसूदन की बहन कहती हैं कि सीएम हाउस से भरोसा मिला था। उम्मीद है, अब कुछ पैसा मिलेगा।
लिम्काबुक से क्वालिफाइड हैं मधुसूदन
- मधुसूदन ने जम्मू-कश्मीर के जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक माउंट एवरेस्टिंग कोर्स (पर्वतारोहण) एडवांस किया। ट्रेनिंग थाजीबास ग्लेशियर (सोनमर्ग) से की।
- बेंगलुरु से गोवा 450 किमी साइकिलिंग की 2015 में। इसके लिए लिम्का बुक से क्वालिफाइड हैं।
प्रदेश के ये पर्वतारोही भी फतह कर चुके हैं एवरेस्ट
- भोपाल के भगवान दास और सतना के रत्नेश एवरेस्ट पर चढ़ चुके हैं। भगवान और रत्नेश ने भी पिछले साल 19-20 मई को ही एवरेस्ट फतह किया था।
- बता दें कि 2009 में अमेरिका के जॉर्डन रोमेरा ने 13 की उम्र में एवरेस्ट फतह किया। वे विश्व के सबसे छोटे पर्वतारोही हैं।
मधुसूदन के मोटिवेटर योगेंद्र देशमुख बताते हैं कि 6 सालों से वो एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए कोशिश कर रहा था। मधुसूदन के मोटिवेटर योगेंद्र देशमुख बताते हैं कि 6 सालों से वो एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए कोशिश कर रहा था।
मधुसूदन लिम्का बुक से क्वालिफाइड हैं। (फेसबुक से ली गई फोटो) मधुसूदन लिम्का बुक से क्वालिफाइड हैं। (फेसबुक से ली गई फोटो)
इंदौर से मधुसूदन के रवाना होते समय ली गई सेल्फी। इंदौर से मधुसूदन के रवाना होते समय ली गई सेल्फी।
एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान मधुसूदन अन्य पर्वतारोहियों के साथ। एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान मधुसूदन अन्य पर्वतारोहियों के साथ।
बर्फ के पहाड़ पर कुछ इस तरह तंबू में रहा जाता है। बर्फ के पहाड़ पर कुछ इस तरह तंबू में रहा जाता है।
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पर्वतारोही मधुसूदन पाटीदार।पर्वतारोही मधुसूदन पाटीदार।
मधुसूदन के मोटिवेटर योगेंद्र देशमुख बताते हैं कि 6 सालों से वो एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए कोशिश कर रहा था।मधुसूदन के मोटिवेटर योगेंद्र देशमुख बताते हैं कि 6 सालों से वो एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए कोशिश कर रहा था।
मधुसूदन लिम्का बुक से क्वालिफाइड हैं। (फेसबुक से ली गई फोटो)मधुसूदन लिम्का बुक से क्वालिफाइड हैं। (फेसबुक से ली गई फोटो)
इंदौर से मधुसूदन के रवाना होते समय ली गई सेल्फी।इंदौर से मधुसूदन के रवाना होते समय ली गई सेल्फी।
एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान मधुसूदन अन्य पर्वतारोहियों के साथ।एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान मधुसूदन अन्य पर्वतारोहियों के साथ।
बर्फ के पहाड़ पर कुछ इस तरह तंबू में रहा जाता है।बर्फ के पहाड़ पर कुछ इस तरह तंबू में रहा जाता है।
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