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फोन कॉल से मिलने वाली राशि लड़कियों के ही पास जाती है

6 वर्ष पहले
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दृष्टिहीनलड़कियों को कमतरी की सोच से बाहर लाने में और उनमें भी आत्मनिर्भरता पैदा करने के 42 लड़कियों का इंटरव्यू लिया था। इनमें से 17 लड़कियों का चयन हुआ। इस आंकड़े को 50 से भी आगे ले जाने की कोशिश है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली हर बालिका को औसत पचास कॉल करने होते हैं। हालांकि फिलहाल कम कॉल ही बिजनेस में कन्वर्ट हो पाते हैं, लेकिन कर्मचारियों के मुताबिक यह स्तर भी बालिकाओं की क्षमता से काफी ज्यादा है। इन बालिकाओं को अपनेपन के अहसास, उचित मार्गदर्शन और उनकी घंटों की प्रैक्टिस देने के कारण आज यह संघ के अंदर संचालित यह ट्रेनिंग सेंटर सोशल सर्विस की नई मिसाल बनकर उभरा है।

मोबाइलएप बनाने की योजना

कंपनीने टेली कॉलिंग से जुड़ा सारा डाटा ब्रेल लिपि में बदलवाया है। काम और सरल बनाने के लिए अब कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर डेवलप मोबाइल एप्लीकेशन बनाने पर भी काम कर रही है। इसमें एप्प इस शीट को पढ़कर कॉलर को सुना देगी।

कम्युनिकेशनकी हर सीख

लड़कियांप्रोफेशनल टेली कॉलर की तरह बात कर सकें, इसलिए रोजाना दो घंटे की ट्रेनिंग दी जाती है इसमें सॉफ्ट स्किल्स, कम्युनिकेशन स्किल्स, कम्युनिकेशन एटीकेट, टेली कम्युनिकेशन इंडस्ट्री नॉलेज, प्रोडक्ट एंड प्रोसेस नॉलेज, स्पोकन इंग्लिश और पर्सनालिटी डेवलपमेंट जैसे अहम बिंदुओं का प्रशिक्षण शामिल है। बालिकाओं की मदद के लिए उनके साथ हर समय एक महिला कर्मचारी मौजूद रहती है। कस्टमर फीडबैक के आधार पर काम में सुधार कराया जाता है। केंद्र की छह बालिकाएं बीएड डिग्रीधारी हैं, वहीं तीन पोस्ट ग्रेज्युएशन कर रही हैं। चार लड़कियों ने पीजी कर लिया है। पांच ग्रेजुएट हैं। तीन लड़कियां बीए (म्यूजिक) की छात्रा हैं।

^आत्मविश्वास बढ़ा

टेलीकॉलिंग ट्रेनिंग ने हमें बोलना सिखाया। हमारा आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा है। इससे हमें अपने पैरों पर खड़े होने में मदद मिली है, यहां का अनुभव आगे भी काफी मदद करेगा।

नीलमसिंह, प्रशिक्षु

^बिजनेस औररोजगार भी

इनलड़कियों को अवसर मिलने की जरूरत है। इससे हमें बिजनेस मिल रहा है और बालिकाओं को रोजगार। यहां की सीख भविष्य में काफी मदद देगी।

यशवंतसिंह, सीईओ,रिलायंस कम्युनिकेशन

सोनू चौहान (निवासी झाबुआ) के लिए टेली कॉलिंग की ट्रेनिंग ने मानो नई राहें खेल दी हैं। धाराप्रवाह उच्चारण, प्रोडक्ट से जुड़े हर सवाल का सटीक जवाब और क्लाइंट में बदलने की उसकी कूवत देखते ही बनती है। संगीत में बीए सोनू के आत्मविश्वास को टेली कॉलिंग की ट्रेनिंग ने नई ऊंचाइयां दी हैं।

सारणी की संध्या अंबुलकर ने एमफिल किया है वो 16 साल से महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ का हिस्सा है। संध्या अब एक अच्छी टेली कॉलर भी है। पिछले डेढ़ माह की ट्रेनिंग के बाद वह आम पेशेवर टेली कॉलरों को भी मात दे रही है। उसके मन में हौसले का सूरज जगमगा रहा है।

^15 से50 तक पहुंचाने की कोशिश

हमइन लड़कियों को नो प्रॉफिट-नो लॉस के तहत टेली कॉलर की ट्रेनिंग दे रहे हैं। हमारा मकसद इन्हें अपने पैरों पर खड़े होने लायक बनाना है। फिलहाल सेंटर में 15 लड़कियां हैं। हमारी कोशिश है कि इस आंकड़े को 50 तक पहुंचाया जाए। कॉल से मिलने वाली सारी राशि स्टायफंड के रूप में सीधे लड़कियों को दे दी जाती है।

अनीताशर्मा, असिस्टेंटमैनेजर (ट्रेनिंग) रिलायंस कम्युनिकेशन