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हर साल आठ करोड़ की दवाएं आती हैं मरीजों के लिए
भोपालसे दवाओं की जांच रिपोर्ट आने में करीब तीन से छह माह का समय लग जाता है। इधर इंदौर के सरकारी अस्पतालों में जांच रिपोर्ट आए बिना ही मरीजों को दवाएं दे दी जाती हैं। यदि रिपोर्ट आने के बाद कोई अमानक दवा निकलती भी है तो कोई मतलब नहीं होता है। इस मामले में जब हमने जिम्मेदारों से बात की तो सब अपनी-अपनी परेशानियों का हवाला देकर बचते नजर आए, मगर मरीजों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कोई भी लेने को तैयार नहीं हुआ।
पहलेइंदौर में होती थी जांच
खाद्यएवं ड्रग विभाग की प्रयोगशाला 1980 के पहले इंदौर में ही थी। इसके बाद उक्त प्रयोगशाला को भोपाल भेज दिया गया। यहां अब पूरे प्रदेश के शासकीय अस्पतालों से भेजी गई दवाओं की जांच होती है और इसीलिए जांच रिपोर्ट आने में देरीहो जाती है। एमवाय अस्पताल में ही आठ करोड़ रुपए की सालाना दवाएं सप्लाई की जाती हैं।