एनीमिया का पता अब डिजिटल मीटर से लगेगा
महिलाओंमें एनीमिया का पता अब डिजिटल मीटर से लगाया जाएगा। इसके लिए करीब 10 हजार एएनएम को ममता टैब दिए जाएंगे। एक डिजिटल हीमोग्लोबिन मीटर भी रहेगा। फिलहाल इसकी टेस्टिंग की जा रही है। परिणाम अच्छे मिले तो इसे सभी जिलों में लागू किया जाएगा। मीटर की विशेषता ये है कि एचबी लेते ही रीडिंग सीधे टैब में रिकॉर्ड हो जाएगी। इसके बाद यह डाटा सीधे ब्लॉक, जिला राज्य स्तर पर पहुंच जाएगा।
प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग मैदानी अमले को नई टेक्नोलॉजी से जोड़ने जा रहा है। राज्य सरकार मातृ-मृत्युदर कम करने के लिए यह प्रयोग करेगी। संयुक्त संचालक डॉ. शरद पंडित ने बताया महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) सबसे बड़ी समस्या है। प्रसूति के दौरान मौत का यही प्रमुख कारण है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला गर्भवती का ब्लड प्रेशर खून की जांच पुरानी पद्धति से करता है। फिर उसकी रीडिंग मैन्युअली करता है जिससे गलती होने की संभावना रहती है। इसी को देखते हुए सरकार टैब खरीदकर एएनएम को देगी। यह ऑफलाइन भी चल सकेगा। इसके लिए विशेष साफ्टवेयर बनवाया जा रहा है जो टैब में ही इंस्टॉल रहेगा। यह एक तरह से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड कीपिंग सिस्टम रहेगा।
24 लाख
गर्भवतीमहिलाओं की एएनसी (एब्सोल्यूट न्यूटोफिल काउंट) की जाती है प्रतिवर्ष।
164प्रतिलाख है मातृ-मृत्युदर इंदौर संभाग में। प्रदेश में मातृ मृत्युदर 235प्रतिलाख है। देश में यह दर 300प्रतिलाख है।
1000एएनएमप्रदेश में और 2000एएनएमसंभाग में। 200एएनएमजिले में।
पहले ये तरीके अपनाए गए
{स्वास्थ्य विभाग सालों से पुराने ढर्रे पर ही चल रहा था। ब्लॉटिंग पेपर पर ब्लड सैंपल डालकर बदलता रंग देख अंदाज लगा लेता था कि महिला का एचबी कितना है?
{ एक साल से हीमोग्लोबिन मीटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें ब्लड सैंपल में केमिकल मिलाकर देखा जाता है।
{ अब डिजिटल मीटर में सैंपल डालते ही खुद-ब-खुद एचबी बता देगा।
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