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पास करवाने से लेकर स्कोरर तक का ठेका

6 वर्ष पहले
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पीएमटीप्रवेश परीक्षा घोटाले में डीबी स्टार की पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी युवक मप्र में परीक्षा में पास करवाने का सिर्फ कांट्रैक्ट लेते हैं बल्कि परीक्षा दिलवाने के लिए स्कोरर फर्जी छात्र भी भेजते हैं। इसके लिए लाखों रुपए में सौदा होता है। इसके बाद फार्म भरने से परीक्षा देने तक का सारा काम कांट्रैक्ट लेने वाले करते हंै। विंध्यवासिनी नाम के एक आरोपी ने गिरफ्त में आने के बाद पूछताछ में इस बात की पुष्टि भी की है। इंदौर एसआईटी के प्रभारी एडिशनल एसपी देवेंद्र पाटीदार की टीम लगातार इस मामले में खोजबीन कर रही है। पाटीदार के मुताबिक अब तक 60 गिरफ्तारियां एसआईटी ने की हैं।

उत्तरप्रदेश की इस गैंग में अधिकांश पढ़ाकू और होनहार छात्र शामिल हैं। ये छात्र कई नामी कोचिंग इंस्टिट्यूट से जुड़े हैं। यह मप्र के कोचिंग संचालकों से संपर्क कर स्टूडेंट्स की डिटेल लेते हैं। इसके बाद यह परीक्षा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से संपर्क करते हैं और फिर उन्हें परीक्षा में पास करवाने का लालच देते हैं।

इसके लिए पूरी गांरटी ली जाती है। इसमें परीक्षा फार्म भरने से लेकर परीक्षा देने तक का प्रोग्राम तय हो जाता है। इसके लिए दो से पांच लाख रुपए पैसा लेते हैं। इसमें प्रदेश के कुछ कोचिंग संचालकों की मिलीभगत भी सामने रही है। यह कोचिंग संचालक छात्रों की पहचान यूपी के स्कोरर छात्रों से करवाते थे।

मप्रके भी स्टूडेंट शामिल

एसआईटीकी जांच में मप्र के धार, झाबुआ, आलीराजपुर, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर जिलों के लड़कों के नाम भी सामने आए हैं। ये सभी स्टूडेंट हंै। यह परीक्षा देने के लिए इधर-उधर संपर्क करते रहे हैं। इसी चक्कर में इनका संपर्क यूपी के स्कोरर्स से हुआ था।

उत्तरप्रदेशके कई शहरों से चल रहा है नेटवर्क

उत्तरप्रदेशके आंबेडकर नगर, लखनऊ, हरदोई, वाराणसी, फरीदपुर, हमीरपुर, फरुख्खाबाद, मऊ, शाहजहांपुर, बनारस, कानपुर के युवकों के इस गैंग मे शामिल होने के पुख्ता प्रमाण एसआईटी के पास हैं, इस आधार पर कई गिरफ्तारियां कर ली गई हैं।