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आईडीए के अफसर मूकदर्शक बने रहे

7 वर्ष पहले
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चायऔर किराना बाजार के नाम से आवंटित इन सैकडों प्लॉटों पर चाय और किराना व्यापारी तो नहीं आए, लेकिन नियमों के खिलाफ यहां होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, फर्नीचर शॉप जरूर बन गए। स्कीम में आईडीए अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध है। निर्माण के समय अफसरों ने कोई कार्रवाई की और मामला सामने आने पर ही कार्रवाई हुई। सिर्फ नोटिस देकर खानापूर्ति कर ली गई। जबकि आईडीए आवंटन निरस्त भी कर सकता है। इसी के मद्देनजर कलेक्टर ने जांच आईएएस और प्रभारी एडीएम को सौंपी है।

आईडीएके प्लॉट पर नियम विरुद्ध किए गए कब्जे

चायबाजार के ये प्लॉट रिकॉर्ड में किसी और के नाम पर है जबकि बाजार में बिकने के बाद असली मालिक कोई और हो गए हैं। लीज डीड के नियमों के मुताबिक से प्लॉट बिक नहीं सकते। प्लॉट 41 पर स्वराज इंटरप्राइजेस निर्माण कर रहा है जबकि आईडीए रिकॉर्ड में यह प्लॉट मेसर्स केशवप्रसाद शिवप्रसाद के नाम पर है। इसके बावजूद करोड़ों रुपए मूल्य के प्लॉट को पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर बाजार में स्वराज इंटरप्राइजेज के मोहित पिता अमरलाल 135 पलसीकर कॉलोनी ने खरीद लिए। नियम के खिलाफ बाजार में प्लॉट खरीदने और बेचने वालों ने यह गलती कर दी की आईडीए के रिकॉर्ड में फर्म का नाम नहीं बदला गया।

प्लॉटपर मकान की रजिस्ट्री हो गई

मामलेका खुलासा हुआ तो आईडीए ने प्लॉटधारक व्यापारियों को नोटिस दिया कि आपने प्लॉट पर आवंटन के बावजूद निर्माण नहीं किया इसलिए आपका प्लॉट निरस्त किया जा रहा है। यह नोटिस मेसर्स केशवप्रसाद शिवप्रसाद के संचालक को भी मिला। वो जवाब देते उससे पहले ही स्वराज इंटरप्राइजेज ने जवाब देकर कहा कि हमने प्लॉट नंबर 41 पर बना मकान खरीदा था और इसे हम फिर बना रहे हैं जबकि मकान की रजिस्ट्री होकर सिर्फ प्लॉट की रजिस्ट्री हुई है। आईडीए के अफसरों ने यह जानते हुए भी कि प्लॉट नहीं बेचा जा सकता है फिर भी निर्माण को लेकर लापरवाही बरती, िजससे करोड़ों रुपए मूल्य के प्लॉट बिक गए और दूसरी फर्म ने निर्माण भी शुरू कर दिया।

प्लॉट घोटाले... पेज 1 से जारी

^हम आजबोर्ड की बैठक बुला रहे हैं

हमचाय बाजार से संबंधित मामलो को लेकर 26 सितंबर को बोर्ड बैठक बुला रहे हैं। इसमें बोर्ड के सदस्य बात करेंगे। इसके बाद फिजिकल वेरिफिकेशन भी होगा। इसमें 41 नंबर प्लॉट के मामले में कार्रवाई पर बात होगी।

शंकरलालवानी, चेयरमैन,आईडीए