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लोकल फंड ऑडिट मेंे आधे पद हैं खाली, काम प्रभावित
प्रदेशसरकार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने को लेकर उदासीन नजर रही है। शायद इसीलिए लंबे समय से मप्र स्थानीय निधि संपरीक्षा के खाली पदों को भरने के लिए जिम्मेदारों ने कोई कदम नहीं उठाया है, जबकि लोकल ऑडिट में कई गड़बड़ियां सामने चुकी हैं। डीबी स्टार को मिली शिकायत पर पड़ताल कि तो सामने आया कि इस वजह से कई स्थानीय निकायों के ऑडिट में वक्त लग रहा है, वहीं कई जगह तो वर्षों से ऑडिट ही नहीं हुआ है।
करोड़ोंका लेन-देन
वर्तमानमें निकायों में विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों-अरबों रुपए का लेन-देन हो रहा है। इसमें मनरेगा, पंच परमेश्वर जैसी प्रमुख हितग्राही योजनाएं शामिल हैं। ऐसी स्थिति में ऑडिट के पद खाली होने से काफी लेटलतीफी हो रही है। नगरीय निकायों की भी गरीबी उन्मूलन और एडीबी योजनाओं का नियमानुसार ऑडिट ही नहीं हो पा रहा है। अफसरों के इस गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के चलते कई योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पा रही है। स्थानीय निकायों में गुणवत्तापूर्ण ऑडिट तथा प्रतिवर्ष 100 प्रतिशत ऑडिट का लक्ष्य ही प्राप्त नहीं हो रहा है। इसकी मुख्य वजह है संचालनालय स्थानीय निधि संपरीक्षा में मंजूर 1300 पदों में से 600 से ज्यादा पद खाली होना। ऐसी स्थिति में सरकार इन स्थानीय निकायों पर वित्तीय अनुशासन लागू करने में कितनी उदासीन है यह स्पष्ट होता है। स्थानीय निधि संपरीक्षा में अतिरिक्त संचालक का 1, संयुक्त संचालक के 9, उप संचालक के 11 पद खाली हैं। सहायक संचालक के 32, ज्येष्ठ संपरीक्षक के 37 तथा सहायक संपरीक्षक के 390 पद पदोन्नति नहीं होने के कारण रिक्त हैं। इसके अलावा अन्य भी कई पद लंबे समय से रिक्त है।