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दागी कंपनी को खुद अस्पताल करेंगे बैन

6 वर्ष पहले
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डीबीस्टार में अमानक दवाओं के प्रयोग का खुलासा होने के बाद एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एमवाय प्रशासन ने तय किया है कि आगे से कुछ ऐसा प्रबंध किया जाएगा कि किसी मरीज को अमानक दवा नहीं दी जा सके। अमानक दवा सप्लाई करने वाली कंपनियों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। भोपाल से दवा की जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द इंदौर पहुंचे इसके लिए भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

डीबी स्टार की पड़ताल में पता चला था कि किस तरह चिकित्सा शिक्षा विभाग में अमानक दवाएं सप्लाई हुईं और ड्रग विभाग की रिपोर्ट में जब तक इसका खुलासा हुआ, तब तक यह चाचा नेहरू अस्पताल में मरीजों को दी जा चुकी थी। इसके अलावा यही व्यवस्था एमवाय अस्पताल में भी बदस्तूर जारी रही है। पूरे मामले में अब एमजीएम मेडिकल कॉलेज और एमवाय प्रशासन इस गलती को नहीं दोहराने के लिए कुछ नियमों को बनाने की तैयारी कर रह है ताकि इससे सबक सीखा जाए।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. राहुल रोकड़े ने बताया कि डीबी स्टार में अमानक दवाओं के मामले के बाद हम इस मामले में शासन के वरिष्ठ अफसरों से बात कर ऐसी व्यवस्था बनाने पर जोर दे रहे हैं ताकि इस तरह की गलती आगे से नहीं दोहराई जाए।

एमवाय अस्पताल के अधीक्षक एडी भटनागर के मुताबिक जिन कंपनियों की जांच में अमानक दवा निकली है, सरकार उनको ब्लैक लिस्टेड बाद में करेगी, हम खुद ही ऐसी कंपनियों से दवा नहीं खरीदेंगे। हम शासन को इस मामले में पत्र भी लिख रहे हैं कि मरीजों तक दवाएं पहुंचने के पहले ही उसकी जांच जल्दी से हो सके। इसके लिए कोई व्यवस्था की जाए या ड्रग विभाग में ही संसाधन बढ़ाए जाएं।

चाचा नेहरू अस्पताल के अधीक्षक डॉ. शरद थोरा ने कहा है कि मैंने शासन को पत्र लिखा है कि दवाओं की जांच रिपोर्ट जल्द ही आना चाहिए। इसके अलावा अमानक दवा सप्लाई कंपनियों को तत्काल बैन करना चाहिए।