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तब टंडन भारी पड़े थे ्अब बाबा की बारी आई
अश्विन जोशी यूं भी राजनीतिक लेन-देन ज्यादा समय नहीं रखते हैं और यदि मामला टंडन के बोल-वचन का हो तो फिर पहली फुरसत में मामला निपटना ही था। मौका सच सलूजा के सेवादल की इंदौरी कमान संभालने का था। किसी को उम्मीद नहीं थी कि बाबा यहां पहुंचेंगे, लेकिन वो पहुंच गए, कुछ सूरतें तो उन्हें देखते ही उतर गई थीं कि बंदा बोले बिना रहेगा नहीं ओर बोला तो पिछले हिसाब चुकाए बिना नहीं रहेगा। टंडन ने ओझा से उम्मीद लगाई कि वो बाबा पर कोई तो काबू वाला मंत्र पढ़ें कि सबके सामने झांकी बिगड़े, लेकिन अश्विन रुकने वाले थे और झांकी की खैर थी। बाबा बोले और जमकर बोले। इतना कि अगली बार टंडन किसी ज्ञापन पर प्रदेश अध्यक्ष की साइन करवाना भूल जाएं, लेकिन बाबा को नजरअंदाज नहीं कर सकेंगे। सच ने पदभार लिया और इधर बाबा के बोले सच ने कांग्रेस में हलचल तेज कर दी। टंडन सबकुछ भूलकर ओझा को यह अहसास दिलाने में लगे हैं कि आप दिल्ली संभालो और मैं शहर में आपका झंडा उठाए रखता हूं, लेकिन जो वाक्य बाबा ने बोले हैं उनसे ओझा भी टंडन को लेकर सतर्क तो हो ही गई होंगी। {खबरची