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संविदा वाले ही संभाल रहे हैं जल संसाधन विभाग
जलसंसाधन विभाग की राजघाट परियोजना दतिया के चीफ इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव गत जून माह में रिटायर हो गए, लेकिन वे अभी भी इसी पद पर काम कर रहे हैं। श्री श्रीवास्तव अकेले ऐसे इंजीनियर नहीं हैं, उन्हीं की तरह विभाग केे मुखिया प्रमुख अभियंता एमजी चौबे चीफ इंजीनियर संतोष कुमार खरे सहित आधा सैकड़ा इंजीनियर कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद संविदा पर नियुक्त कर महत्वपूर्ण प्रभार सौंप दिया गया है। संविदा नियुक्ति मिलने वालों में प्रमुख रूप से संतोष कुमार खरे (सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता), एसके खरे (सेवानिवृत्त मुख्य कार्यपालन यंत्री), ऋषभ कुमार गोयल (सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री), एसएल जैन (सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता सिविल), अंजनि कुमार आर्य (सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता), वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री), शहनाज सुल्तान (सेवानिवृत्त, अनुसंधान अधिकारी), डॉ. नागेंद्र प्रसाद मिश्रा (सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री) के अलावा केएल चंद्रोल (सेवानिवृत्त सहायक ग्रेड-1), अवधेश कुमार चौबे ( सेवानिवृत्त वरिष्ठ निज सहायक) आदि शामिल हैं।
प्रमुख अभियंता आरके चाचौंदिया 2006 में रिटायर हुए, लेकिन जमे हुए हैं। अब वे कमांड क्षेत्र विकास परामर्शी विशेषज्ञ हैं। सेवा शर्तों के मुताबिक मानदेय 40 हजार रुपए और शासन के वाहन का प्रयोग नहीं करते हैं, तो 20 हजार रुपए अतिरिक्त दिए जाएंगे।
प्रमुख अभियंता एमजी चौबे आज भी अपने पद पर बने हुए हैं। उनकी हर साल संविदा नियुक्ति बढ़ाई जा रही है। वे 2015 तक इस पद पर बने रहेंगे। श्री चौबे की तरह ही अनेक अधिकारी तथा कर्मचारी हैं, जिन्हें उपकृत करने के लिए संविदा नियुक्ति दी जा रही है।
कार्यपालन यंत्री मोहन सिंह सेवानिवृत्त हैं। इसी पद पर उनकी संविदा नियुक्ति कर दी गई। सिंह को संविदा नियुक्ति की अनुमति मिली जुलाई में और उसका क्रियान्वयन हुआ एक मई से। ऐसा क्यों हो रहा है, इसका जवाब अफसरों के पास नहीं है।
राजघाट परियोजना दतिया में रहे मुख्य अभियंता संजीव श्रीवास्तव गत जून माह में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद भी वे अब तक अपने प्रभार में बने हुए हैं हालंाकि श्रीवास्तव की अभी तक संविदा नियुक्ति नहीं हुई है, लेकिन प्रमुख सचिव की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सहित विभाग के अनेक महत्वपूर्ण कार्य अभी भी वे ही कर रहे हैं।
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