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बनाना था म्यूजियम और बना दी गई लाइब्रेरी
राजमाताविजयाराजे सिंधिया एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने एग्रीकल्चर साइंस म्यूजियम बनाने में जल्दबाजी दिखाई और बजट को आनन-फानन ठिकाने लगा दिया गया। म्यूजियम शुरू करने के लिए पांच करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयारी किया गया है। इस प्रस्ताव को आदिम जाति कल्याण विभाग को भी भेजा गया, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब तो यूनिवर्सिटी के पास बजट है और ही अब इसके लिए कोई बजट स्वीकृत कर रहा है।
लाइवहोती कृषि प्रणाली
म्यूजियम में अलग-अलग प्रदेशों की कृषि प्रणाली को लाइव देखा जा सकता था। म्यूजियम में प्राचीन आधुनिक कृषि यंत्र, बीज तथा कीटनाशक की जानकारियां तुरंत मिलनी थीं। वैज्ञानिक खेती की जानकारी भी म्यूजियम में लाइव दिखाई जाती। इसके अलावा देश भर में इस म्यूजियम को ऑनलाइन देखा जा सकता था। यही नहीं बिग स्क्रीन तथा साउंड सिस्टम के माध्यम से कृषि से संबंधित जानकारी यहां आने वाले लोगों को मिलनी थी।
ऐसापहला म्यूजियम होगा
इसम्यूजियम में आदिवासी विकास, कृषि के प्रकार, उनका इतिहास आदि को लाइव देखा जा सकेगा। देश में इस तरह का अभी कोई भी म्यूजियम नहीं है। यही कारण है कि बजट के लिए आदिम जाति विकास को प्रस्ताव भेजा गया है। कृषि विषय के छात्र इस इससे रिसर्च कर सकते थे। यहां कृषि की बेहतरीन कितबें आधुनिक रिसर्च भी यहां देखने को मिलेंगे।
म्यूजियमपर नहीं दिया ध्यान
म्यूजियमशुरू होने के कारण यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने बिल्डिंग में लाइब्रेरी शुरू कर दी। अब अधिकारियों का कहना है कि लाइब्रेरी का भवन बन रहा है, भवन बनते ही लाइब्रेरी शिफ्ट कर देंगे।
^प्रयासकररहे हैं
एग्रीकल्चरसाइंस म्यूजियम बनाने के लिए बजट तो आईसीआर ने दिया था, लेकिन अन्य संसाधनों के लिए बजट नहीं मिल पाया। इस कारण म्यूजियम शुरू नहीं हो पा रहा है। हम प्रयास कर रहे हैं कि म्यूजियम जल्द शुरू हो सके। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रोएके सिंह, कुलपति,कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर