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दागी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए भोपाल से हरी झंडी का इंतजार
डायरेक्टोरेटसेंट्रल ऑफ हेल्थ सर्विसेज से अनुसार एक आरटीआई में दी गई अधिकृत जानकारी के अनुसार गलत दवाओं के कारण पिछले चार सालों में 1722 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखकर केंद्र और राज्य में मरीजों को दवाएं देने के पहले उनकी पुख्ता जांच करने के नियम बनाए गए थे।
चाचा नेहरू अस्पताल में पिछले साल अमानक दवाओं का मामला सामने आने के बाद भी उसे रिकॉर्ड पर नहीं लिया, जबकि इसका इस्तेमाल 2000 से ज्यादा बच्चों पर हुआ था। डीबी स्टार ने पड़ताल की तो पता चला कि जैसे ही यह मामला ड्रग एंड फूड विभाग की जानकारी में आया था उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी चाचा नेहरू अस्पताल के प्रभारी डॉ. शरद थोरा को दी थी।
डॉ. थोरा से पूछा कि कोटरिमैक्साजोन नामक अमानक दवा क्या मरीजों को बांट दी गई? डॉ. थोरा का जवाब था कि तो जांच रिपोर्ट आने के पहले ही अमानक दवा पूरी तरह से बंट चुकी थी? जब उनसे पूछा गया कि इस दवा के प्रयोग से मरीजों पर क्या प्रभाव पड़ा, उन्हें क्या-क्या परेशानी आई? इस पर थोरा का कहना था कि कोई भी मरीज अब तक इस दवा को लेकर पलटकर नहीं आया और ही किसी ने अब तक किसी भी तरह की शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने मामले को फाइल क्लोज कर दी।
इतना सब होने के भी विभाग ने तो यह जानने में रुचि दिखाई गई कि मरीजों को इससे क्या परेशानी हुई और ही सप्लाई करने वाली कंपनी पर किसी तरह की कार्रवाई के बारे में सोचा गया। चाचा नेहरू अस्पताल ने इस मामले को भी सामान्य तरीके से लेकर खत्म कर दिया। कायदे से अब तक दागी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई हो जानी थी।