खतरे में धरोहर
राज्यपुरातत्व विभाग के स्टाफ ने विश्व प्रसिद्ध शाल भंजिका को पिछले कुछ समय से एक कमरे में बंद कर दिया है। जो पर्यटक इसे देखना चाहते हैं, उन्हें कमरे की चाबी होने का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। दुर्ग के गूजरी महल पर तैनात स्टाफ लोगों को शाल भंजिका मूर्ति दिखाने में आनाकानी कर रहा था। बाद में जब इसका कारण जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि ये मूर्तियां खतरे में हैं और इनका मूल स्वरुप ही बिगड़ रहा है।
संग्रहालय में 5वीं से 19वीं सदी की बहुमूल्य मूर्तियां रखी हैं। गत चार साल से केमिकल ट्रीटमेंट होने के कारण इनमें से कई प्रतिमाएं काली पड़ रही हैं। टीम ने जब इस बारे में अधिकारियों से बात की तो उन्होंने बजट की कमी का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ लिया। यहां शाल भंजिका के अलावा नटेस शिव, वामन विष्णु और गुप्त काल का एक दरवाजे का सरदल जैसी प्राचीन दुर्लभ मूर्तियां शिलालेख हैं। गूजरी महल के विशाल बरामदे में मूर्तियों के साथ ही कबाड़ा भी रख दिया गया है। अष्टधातु की बनी ऐतिहासिक तोप को भी जमीन पर पड़ी है।
10वींशताब्दी की है शाल भंजिका
शालभंजिका त्रिभंग मुद्रा में खड़ी एक महिला की दुर्लभ और अद्वितीय पत्थर की मूर्ति है। 10वीं शताब्दी की यह मूर्ति विदिशा के पास ग्यारसपुर गांव में खुदाई के दौरान मिली थी। इसके चेहरे पर अद्वितीय मुस्कान के कारण इसे इंडियन मोनालिसा भी कहा गया है।
शाल भंजिका
^दिखाना होगीशाल भंजिका
शालभंजिका की सुरक्षा का यह मतलब नहीं है कि उसे पर्यटकों को दिखाया ना जाए। मैं इस मामले की जानकारी संग्रहालयाध्यक्ष से लेता हूं। बजट का प्रस्ताव मिलते ही बजट जारी कर मूर्तियों का केमिकल ट्रीटमेंट कराया जाएगा।
डॉ.डीके माथुर, पुरातत्ववेत्ता,राज्य पुरातत्व विभाग, मुख्यालय
^मुख्यालय सेमांगा है बजट
मूर्तियोंके केमिकल ट्रीटमेंट के लिए मुख्यालय से बजट मांगा है। शाल भंजिका के महत्व को देखते हुए उसकी सुरक्षा के पूरे बंदोबस्त किए गए हैं। अगर हमें शाल भंजिका दिखाए जाने की शिकायत मिलेगी तो स्टाफ पर कार्रवाई की जाएगी।
एसआरवर्मा, डिप्टीडायरेक्टर, राज्य पुरातत्व विभाग
1000 से अिधक विदेशी पर्यटक हर साल