1500 करोड़ की है जमीन: निगम
नगरनिगम ने हुकमचंद मिल की 48 एकड़ जमीन की कीमत 15 सौ करोड़ रु. बताई है। उसने डीआरटी (डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल) मुंबई में यह जवाब देते हुए जमीन को अपनी बताया और कहा कि उसे बेचा नहीं जा सकता।
22 साल से बंद मिल के छह हजार मजदूर कर्मचारियों को उनकी ग्रेच्युटी के 229 करोड़ रुपए नहीं मिले हैं। मजदूर संगठनों ने मिल की जमीन बेचने के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई है। इधर, आईडीबीआई बैंक का कहना है कि कोटक महिंद्रा बैंक ने मिल के पुराने प्रबंधन को करोड़ों रुपए का कर्ज दिया था। उसने कोटक महिंद्रा से यह अधिकार खरीद लिया है। इसलिए आईडीबीआई बैंक डीआरटी पहुंचा। डीआरटी ने मिल की जमीन नीलामी में बेचने के लिए रिजर्व प्राइज चार सौ करोड़ रु. तय की है। शुक्रवार को डीआरटी में ताजा सुनवाई में निगम ने विशेष जवाब पेश किया। उसमें कहा कि इंदौर के बाजार मूल्य के हिसाब से 48 एकड़ जमीन 15 सौ करोड़ रु. की है। निगम के अधिवक्ता आनंद अग्रवाल के अनुसार, जवाब में यह भी कहा गया कि निगम को मिल प्रबंधन से करोड़ों का टैक्स लीज रेंट लेना है। डीआरटी ने अगली सुनवाई 16 फरवरी को तय की, जिसमें निगम विस्तृत रूप से पक्ष रखेगा।
जमीन पर सरकार का भी दावा
मजदूरकर्मचारियों की देनदारी मिल की जमीन बेचने के बाद ही हो सकती है। इसलिए मजदूर संगठनों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई है, जो विचाराधीन है। सुनवाई में राज्य सरकार भी जमीन पर अपना दावा जता चुकी है। इसी कारण सरकार भी जमीन बेचने की अनुमति नहीं दे रही है। उधर, मजदूर जमीन बिक्री की अनुमति के लिए सरकार से मांग और आंदोलन कर रहे हैं।