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एमवाय अधीक्षक ठाकुर को हटाने के पीछे प्राइवेट प्रैक्टिस लॉबी
ठाकुर को हटाने का फैसला सरकार का, कोर कमेटी दखल नहीं देती: शर्मा
भाजपा नगर अध्यक्ष के बदले सुर
शुक्रवार को भाजपा कोर कमेटी के सदस्यों ने एकमत होकर ठाकुर को हटाए जाने का विरोध किया था। शनिवार को नगर अध्यक्ष कैलाश शर्मा से जब इस संबंध में बात हुई तो उनके सुर अन्य कोर कमेटी सदस्यों से बिल्कुल नहीं मिले। शर्मा ने कहा ठाकुर को हटाने का फैसला शासन का है। कोर कमेटी सरकार के काम काज में दखलंदाजी नहीं करती है। शर्मा की इस बात के बाद अन्य सदस्यों से बात हुई तो उन्होंने कहा ग्वालियर का नेता इंदौर के मिजाज से कैसे वाकिफ हो सकता है। संगठन में व्यवस्था है कि कोर कमेटी सरकार को शहर की स्थिति से अवगत करवाती है। इसमें प्रशासनिक फैसले भी शामिल होते हैं। एक सदस्य ने कहा-सुंदरलाल पटवा के मुख्यमंत्री काल में यह व्यवस्था शुरू हुई थी। तभी से कोर कमेटी की बात का सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। सरकार कमेटी के सुझाव पर तबादले तक कर देती थी।
भास्कर संवाददाता. इंदौर
एमवाय अधीक्षक डॉ. पीएस ठाकुर को हटाने के पीछे प्राइवेट प्रैक्टिस लॉबी का दबाव माना जा रहा है। संघ समर्थकों ने समय रहते सरकार के नुमाइंदों तक यह बात पहुंचा भी दी थी बावजूद ठाकुर को हटा दिया।
भाजपा कोर कमेटी ने शुक्रवार को शासन के इस निर्णय के खिलाफ एकमत होकर अपनी बात रखते हुए कहा- ठाकुर की प्रशासनिक क्षमता अच्छी है और उन्हें नहीं हटाया जाना चाहिए था। हालांकि इसके बाद भी स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा संगठन पर भारी ही नजर रहे हैं। ठाकुर के मामले में मिश्रा कोई भी बात करने को तैयार नहीं है। कुछ नेताओं ने इसे मंत्री की मनमानी तक कह डाला। उधर, मंत्री का कहना है कि ठाकुर के तबादले को लेकर कुछ पता नहीं है। जबकि प्रमुख सचिव अजय तिरकी ने भी इस पूरे मामले में चुप्पी साध रखी है। भाजपा कोर कमेटी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि कुछ डॉक्टरों की एक लॉबी एमवाय की व्यवस्था को दुरुस्त होने देना ही नहीं चाहती। उसे लगता है कि एमवाय में अगर कुछ ठीक होने लगा तो निजी अस्पतालों में कौन आएगा? वहीं एमवाय में पदस्थ होकर जबर्दस्त प्राइवेट प्रैक्टिस करने वालों को भी परेशानी है।