87 की उम्र में परंपरा सेहेजता एक कलाकार
आपजैसे ही उनके घर जाएंगे, दीवारों पर वॉश टेकनिक और टेम्परा में बनी पेंटिंग्स दिखाई देंगी। ये पेंटिंग्स हैं 87 साल के पेंटर दीनानाथ भार्गव की। एक ऐसे समय में जब इस उम्र में लोग थक कर रचनाकर्म छोड़ देते हैं वे आज भी रचनाकर्म में संलग्न हैं। और यही नहीं, रचनारत रहते हुए वे युवाओं की इस भुला दी जा रही टेकनिक सिखाना चाहते हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने इंदौर में युवा कलाकारों और कला के विद्यार्थियों को इस टेकनिक का प्रशिक्षण दिया था।
शांतिनिकेतन में ली कला की शिक्षा
डॉ.भार्गव का जन्म बैतूल के मुलताई में हुआ। स्कूली शिक्षा लेने के बाद उनकी रुचि कला में पैदा हुई और वे शांतिनिकेतन कोलकाता चले गए। वे कहते हैं कि मैं कलाकार बनना चाहता था और शांति निकेतन की बहुत प्रतिष्ठा थी। लिहाजा मैंने सोचा कि मुझे कोलकोता जाना चाहिए। मैंने शांति निकेतन से कला की शिक्षा हासिल की। वहां का माहौल बहुत अच्छा था और कला के एक से एक गुरु थे। मैंने नंदलाल बोस से कला की शिक्षा हासिल की। उन्होंने हमें वॉश और टेम्परा में काम करना सिखाया।
दीनानाथ भार्गव
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