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प्रस्ताव पास होते ही मिल जाएगा डीम्ड यूनिवर्सिटी का खास दर्जा
इंदौर का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज एसजीएसआईटीएस अब डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने की राह पर है। इसे यूनिवर्सिटी बनाने के लिए केंद्र सरकार की राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा योजना के तहत प्रदेश के तकनीकी शिक्षा विभाग ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को यह प्रस्ताव भेजा है। रूसा के तहत ऐसे संस्थानों के उत्थान की योजना है जो शैक्षणिक गुणवत्ता में अव्वल हैं। संस्थान मापदंडों पर खरा उतरा तो खास दर्जे के साथ 70 करोड़ रुपए मदद भी मिलेगी। तकनीकी शिक्षा विभाग ने संस्थान केे इन्फ्रास्ट्रक्चर, कोर्स आदि की जानकारी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के रूसा को भेजा है। सालों से इंस्टीट्यूट को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने की बातें हुई लेकिन कठिन प्रक्रिया के चलते ऐसा हो नहीं सका अब खुद केंद्र सरकार ने प्रस्ताव मांगकर राह आसान कर दी है।
क्षेत्र के लिए खास
एसजीएसआईटीएस को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलते ही यह इंदौर संभाग ही नहीं मालवा निमाड़ क्षेत्र में भी तकनीकी शिक्षा की पहली डीम्ड यूनिवर्सिटी बन जाएगी। इससे शहर की तकनीकी शिक्षा के मामले में अलग पहचान होगी।
62 साल पुराना इंस्टीट्यूट 35 एकड़ जमीन
1952 में स्थापित एसजीएसआईटीएस शहर का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज है। कॉलेज के पास करीब 35 एकड़ खुद की जमीन है जबकि डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए 25 एकड़ जमीन की शर्त है। 2008 में भी एसजीएसआईटीएस को डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए पत्र व्यवहार हुआ लेकिन नतीजा सिफर रहा क्योंकि तब नई सोसायटी बनाए जाने की शर्त लगा दी गई थी।
^हमने डीम्डयूनिवर्सिटी का प्रस्ताव भेजा है
हमनेइंस्टीट्यूट को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव तकनीकी शिक्षा संचालनालय भोपाल द्वारा रूसा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान मानव संसाधन विकास मंत्रालय नई दिल्ली भेजा है। उनके मापदंडों के मुताबिक इंस्टीट्यूट खरा उतरता है इसलिए डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने में परेशानी नहीं होगी।
डॉ.एसएस भदौरिया, डायरेक्टरएसजीएसआईटीएस