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स्टाफ 12 का, लेकिन पांच किट से ही चला रहे थे काम
मरीज का रिकॉर्ड लेने अस्पताल पहुंचे परिजन
कुछदिन पहले एमवायएच के स्वाइन फ्लू वार्ड में गौरी नगर निवासी 16 साल की लड़की की मौत हो गई थी। वह स्वाइन फ्लू की संदिग्ध मरीज थी। उसकी एन1 एच1 रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद परिजन इस बात को लेकर आक्रोशित हुए कि बेटी को स्वाइन फ्लू वार्ड में क्यों रखा? फिर उन्होंने अस्पताल पहुंचकर मरीज का रिकॉर्ड मांगा। डॉक्टरों ने देने की बात कही। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह इनफ्लूएंजा पॉजीटिव मरीज थी।
बाहरी लोग लगा रहे साधारण मास्क
मरीजोंकी तादाद बढ़ने के बाद अस्पताल प्रशासन जागा और एन-95 मास्क खरीदे गए हैं। वह भी वार्ड में अंदर जाने वाले परिजन, मरीज और स्टाफ को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। बाहर खड़े लोग ओटी में इस्तेमाल होने वाला साधारण मास्क पहन रहे हैं। कई लोग मुंह पर कपड़ा बांधकर घूम रहे हैं।
200
प्रमुख सचिव प्रवीर कृष्ण सोमवार को इंदौर के सरकारी और निजी अस्पतालों का मुआयना करेंगे। पीएस ने बताया वह संसाधनों की उपलब्धता, प्रचार-प्रसार और इंतजाम का जायजा लेंगे। उधर, सूचना मिलते ही जेडी ने अधिकारियों की बैठक बुलवा ली। हालांकि विभाग की ओर से वीटीएम सॉल्यूशन प्रोटेक्शन किट खरीदने में की जा रही लेतलाली को देखते हुए दोपहर में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने 50 पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) किट मंगवाईं। स्वाइन फ्लू वार्ड में काम करने वालों के लिए यह किट जरूरी है। वार्ड में 10-12 कर्मचारियों का स्टाफ है लेकिन किट पांच ही थीं।
जिला अस्पताल सहित शहर के तीन बड़े अस्पतालों में कुल 200 मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। सीएमएचओ डॉ. महेश मालवीय का कहना है कि यह सभी ए-कैटेगरी के ही मरीज हैं, जिन्हें केवल सामान्य जुकाम था।
पीपीईकिट में एमवाय कर्मचारी। इसमें गाउन, हैंड ग्लव्स, शू-कवर, फेस मास्क, डिस्पोजेबल चश्मा रहता है। कीमत 800 से 1000 रुपए।