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दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है

7 वर्ष पहले
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मालवाकी शाम में ख़ामोशी से प्रवेश करती गुलाबी ठंड का इस्तेकबाल करने के लिए सारेगामा म्युज़िक स्कूल और सारेगामा लिसनर्स क्लब की साझा बिछात पर गौतम काळे और अनुजा झोकरकर ने गुरुवार को प्रीतमलाल दुआ सभागृह में जगजीत और चित्रा सिंह कुछ जमा 17 ग़ज़लें गाईं।

इनके ज़रिये ग़ज़ल का तेवर और रंग बदलने वाली इस जोड़ी को उन्होंने बड़े सुरीले अंदाज़ में गुनगुनाया गया। बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी से लेकर दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है जैसी लोकप्रिय नज़्मों-गज़लों से सुनने का माहौल बनाया गया।

music programme

गौतम काळे

खुशबू में बसे तेरे खत मैं जलाता कैसे

गौतमकाळे की गायकी में गमक,मुर्की और खरज का बाकमाल शुमार था। अनुजा ने भी बहुत डूब कर ग़ज़लें सुनाई। सफ़र में धूप,शोला हूं, मिलकर जुदा हुए, हर सू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे, तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं, जब कभी तेरा नाम, दर्द बढकर फ़ुग़ा हो जाए, तेरे ख़ुशबू में बसे ख़त मैं जलाता कैसे, दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है, देर लगी आने में तुमको, आए हैं समझाने लोग, इक इक शम्मा अंधेरे में जलाए रखिये और आख़िरी में जगजीत सिंह की सिगनेचर ग़ज़ल सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता ने ग़ज़ल की इस सुरीली महफ़िल का शबाब कुछ और बढ़ा दिया। तबले पर अक्षय जाधव, की बोर्ड पर मंगेश जगताप, हारमोनियम पर राजेन्द्र नागले, गिटार पर शुभम कानूनगो और रिद्म पर सचिन भोंसले ने बेहतरीन साथ दिया।