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जीवन का सच्चा सुख अध्यात्म में ही: स्वामी सर्वलोकानंद

7 वर्ष पहले
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हमभौतिक संसाधनों में सुख खोज रहे हैं। जीवन का सच्चा सुख अध्यात्म में ही है। अपने आपको खोज लेना ही अध्यात्म है। जब तक हम स्वयं को नहीं जानेंगे, भौतिकवाद और अध्यात्म में संतुलन कायम नहीं होगा। बाहर के शत्रु से लड़ना तो आसान है, लेकिन अंदर बैठे काम, क्रोध, लोभ और मोह अध्यात्म से ही दूर होंगे। अध्यात्म हमारे हर तरह के भय को दूर करता है।

यह बात रामकृष्ण मठ एवं मिशन मुंबई के अध्यक्ष स्वामी सर्वलोकानंद महाराज ने गीता भवन के संस्थापक बाबा बालमुकंदजी की 32 वीं पुण्यतिथि पर ‘संपूर्ण एवं सार्थक जीवन की सफलता के लिए आध्यात्मिकता आवश्यक है’ विषय पर प्रवचन में कही। उन्होंने कहा-दुनिया का हर जीव सुख का आकांक्षी है। हम दुनिया के भौतिक संसाधनों में फंसकर एक-दूसरे से बिखर रहे हैं, टूट रहे हैं। इस कारण हमारे बीच मानसिक दूरियां बढ़ गई हैं। हम चंद्रमा पर तो पहुंच गए, अन्य ग्रहों पर भी जाने वाले हैं लेकिन अपने नजदीकी लोगों से दूर होते जा रहे हैं। कारण, भौतिकवाद ही है। हमारे अंदर अहंकार बढ़ गया है। अध्यक्षता पूर्व विदेश सचिव एवं राजदूत एनपी जैन ने की। समारोह के बाद बाबा बालमुकुंदजी की समाधि पर लोगों ने पुष्पाजंलि-श्रद्धांजलि अर्पित की। संचालन महेशचंद्र शास्त्री ने किया। आभार ट्रस्ट के मंत्री गोपालदास मित्तल ने माना।

गीता भवन में बालमुकुंदजी की 32वीं पुण्यतिथि के अवसर पर प्रवचन देते हुए स्वामी सर्वलोकानंद।