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सुप्रीम कोर्ट को बताने के लिए प्रदेश सरकार ने भी रचा स्वांग
पुलिसमें सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में सात बिंदुओं का पालन करना सभी राज्य सरकारों के लिए अनिवार्य किया था। कोर्ट को बताने के लिए कुछ राज्यों ने कानून बनाकर तो कुछ ने मनमाने आदेश पारित करवाकर स्वांग रचा। म.प्र. सरकार भी पीछे नहीं रही और यहां भी स्टेट सिक्युरिटी कमीशन और शिकायत बोर्ड के नाम पर मनमानी की गई।
यह बात उ.प्र., असम और बीएसएफ में डीजीपी रहकर सेवानिवृत्त हुए प्रकाश सिंह ने इंदौर में ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में रविवार को कही। वे यहां प्रदेश के पुलिसकर्मियों के सम्मान समारोह में विशेष उद्बोधन के लिए आए थे। फीनिक्स इवेंट मीडिया ग्रुप और प्रदेश पुलिस द्वारा इस समारोह में आठ श्रेणी इंटेलीजेंस कलेक्शन, साइबर क्राइम, कम्युनिटी पुलिसिंग, बहादुरी, ट्रैफिक मैनेजमेंट, लॉ एंड ऑर्डर, इन्वेस्टिगेशन तथा इनोवेशन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित 30 पुलिसकर्मियों का सम्मान किया गया। इसमें गृहमंत्री बाबूलाल गौर भी शामिल हुए, लेकिन स्वास्थ्य गड़बड़ होने के कारण कुछ समय बाद ही चले गए। प्रमुख सचिव गृह बसंतप्रताप सिंह, एडीजी पवन जैन, आईजी विपिन माहेश्वरी, कलेक्टर आकाश त्रिपाठी और डीआईजी राकेश गुप्ता भी शामिल हुए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ये बिंदु हैं
>स्टेटसिक्युरिटी कमीशन बने ताकि पुलिस बिना दबाव काम करे
>पुलिस स्टेब्लिशमेंट बोर्ड हो ताकि पुलिस को स्वायत्तता मिले
>पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी बने जो गंभीर शिकायतों की जांच करे
>डीजीपी और ऑपरेशनल कर्मचारियों का कार्यकाल दो साल का हो
>अपराध और शांति व्यवस्था के लिए अलग-अलग स्टाफ
> भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग का गठन
पुलिस सुधार की आवश्यकता इसलिए जरूरी
प्रकाशसिंह ने सामाजिक प्रगति का आधार पुलिस सुधार विषय पर आयोजित परिचर्चा में कहा आतंकवाद, माओवाद और भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या है, जिससे पूरे देश पर असर पड़ता है। तीनों ही समस्याओं पर सबसे पहले एक्शन लेने वाली एजेंसी पुलिस ही होती है। अगर पुलिस ने सही एक्शन लिया तो स्थिति कंट्रोल हो जाती है, अगर नहीं तो असर पूरे समाज पर पड़ता है।
इनका हुआ सम्मान
> इंटेलिजेंस कलेक्शन में इंदौर के आरक्षक श्याम पटेल, छतरपुर के सत्येंद्र त्रिपाठी, राम सहायसिंह
> साइबर क्राइम डिटेक्शन में गुना के प्र.आ. संजय गुप्ता, कटनी के विभांशु कोरी, खंडवा के जिते