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बिल्डर के खिलाफ करेंगे लोकायुक्त में शिकायत

7 वर्ष पहले
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कालिंदीगृह निर्माण संस्था की ओर से जब आईडीए के अधिकारियों के समक्ष आपत्ति ली कि वे अधिकार से बाहर जाकर कार्रवाई कर हैं तो बिल्डर की करतूत सामने आई। आपत्ति पर अफसरों ने गौर किया तो पता चला कि आईडीए सीईओ के हस्ताक्षर से पत्र गलत तरीके से जारी किया गया है। संदेहास्पद तरीके से जारी आदेश की जहां आईडीए अधिकारी विभागीय जांच रहे हैं, वहीं कालिंदी गृह निर्माण सहकारी संस्था लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाने वाली है। इस पूरे मामले में राकेश जैन ने आईडीए की निरस्त हो चुकी स्कीम के नाम पर फायदा उठाने की कोशिश की है।

दरअसल आईडीए द्वारा 90 के दशक में कालिंदी गृह निर्माण समिति की जमीन पर स्कीम नंबर-53 घोषित की गई थी। इसके बाद आईडीए द्वारा बाकायदा विकास कार्य शुरू कर सड़क और विद्युत पोल भी लगवा दिए गए थे। बाद में वर्ष 1998 में हाईकोर्ट द्वारा इस जमीन का फैसला कालिंदी गृह निर्माण समिति के पक्ष में सुनाते हुए आईडीए की स्कीम को निरस्त कर दिया गया था। स्कीम निरस्त होने के बाद भी राकेश जैन ने अपने प्रोजेक्ट में स्कीम को वजूद में बताया और स्कीम में प्रस्तावित रोड को ही अपने प्रोजेक्ट का एप्रोच रोड होना भी दर्शाया। इसी क्रम में कालिंदी गृह निर्माण संस्था द्वारा आपत्ति लेने के बाद जैन ने आईडीए का फर्जी पत्र लगाकर एप्रोच रोड बनाने की कोशिश की है।

दोपत्र, दोनों ही अलग-अलग

इसमामले में आईडीए सीईओ के हस्ताक्षर से दो अलग-अलग पत्र जारी हुए हैं। पहला 15 जुलाई 2014 को जारी हुआ है, जिसमें सीईओ ने कहा है कि उक्त रास्ते को हाईकोर्ट के स्टे के कारण खोला नहीं जा सकता। इसके बाद 22 जुलाई 2014 को ही सीईओ के हस्ताक्षर से नगर शिल्पज्ञ नगर निगम के नाम से पत्र निकला है, जिसमें उन्होंने रास्ता खोलने की कार्रवाई करने का कहा है।

इसलिएसंदेह में है बिल्डर

आदेशकी हो रही जांच में बिल्डर राकेश जैन पर ही संदेह जताया जा रहा है। सड़क खुलवाने के लिए जैन ने नगर निगम में आवेदन लगाया था। इसके बाद निगम द्वारा आईडीए सीईओ को पत्र क्रमांक 602/सीई/2014 लिखकर उनका अभिमत मांगा था। निगम द्वारा मांगे गए अभिमत में सीईओ ने पहला पत्र 15 जुलाई 2014 को लिखा, जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए रास्ता नहीं खोलने संबंधी बात लिखी। इसके बाद अचानक से बिना कोई वजह के ही 22 जुलाई को सीईओ ऑफिस से ही दूसरा पत्र जारी हुआ, जि