इलाज करने से किया इंकार, हंगामा
इंदौर| सुबह56 दुकान के नजदीक स्थित डॉल्फिन अस्पताल में मृत बच्चे को वेंटिलेटर पर रखने की बात पर हंगामा हो गया। परिजन तुकोगंज थाने पर शिकायत करने भी पहुंच गए। धार जिले के सादलपुर निवासी रामचंद्र पटेल का कहना था कि 15 दिन पूर्व धार जिला अस्पताल में डिलिवरी हुई थी, जिसमें जुड़वां बच्चे हुए थे। तबीयत बिगड़ी तो डॉल्फिन अस्पताल रैफर कर दिया गया। परिजन का कहना था कि एक बच्चा मर गया और अस्पताल वाले वेंटिलेटर से उसे हटा नहीं रहे हैं। हालांकि दोपहर में वे मृत बच्चे को लेकर गांव चले गए। वहीं इलाज करने वाले शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक फाटक का कहना है कि बच्चा मंगलवार रात को ब्रेन डेड हुआ था। ब्रेन डेड घोषित करने के पहले प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है।
मृत बच्चे को वेंटिलेटर पर रखने से भड़के परिजन
भास्कर संवाददाता | इंदौर
नंदानगर बीमा अस्पताल में बुधवार को एक नए बीमाधारी की पुरानी बीमारी का इलाज करने से इनकार करने पर जमकर हंगामा हो गया। अस्पताल प्रबंधन ने यह कहकर मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया कि नई गाइडलाइन के हिसाब से इलाज नहीं कर सकते।
खातीपुरा निवासी 48 साल के मनोज सूर्यवंशी को गले का कैंसर है। सूर्यवंशी को 2012 में भी गले का कैंसर हुआ था, जिसका एक निजी अस्पताल में इलाज भी चला। दूसरी बार फिर गले में दर्द हुआ। जांच करवाने पर पता चला कि फिर से कैंसर ने उन्हें चपेट में ले लिया। बेटा राहुल एक निजी कंपनी में काम करता है और कर्मचारी बीमा निगम में बीमित है। वह पिता को लेकर बुधवार सुबह 6 बजे बीमा अस्पताल आए। यहां कोई डॉक्टर या स्टाफ भर्ती करने के लिए तैयार नहीं हुआ। परिजन दोपहर 3.30 बजे तक अस्पताल में बैठे रहे। भर्ती नहीं करने से नाराज परिजन दिन भर हंगामा करते रहे। सर्जन डॉ. दिनेश जैन के पास पहुंचे, तब भी यही बताया गया कि मरीज की बीमारी पुरानी है, इस कारण इलाज नहीं हो पाएगा। गौरतलब है कि राहुल ने जुलाई 2013 में कंपनी ज्वाइन की थी, जबकि उसके पिता को बीमारी 2012 में हुई थी।
पुरानीबीमारी का इलाज नहीं कर सकते
^हालही में नई गाइडलाइन जारी हुई है। हमें आदेश है कि बीमित कर्मचारी या सदस्यों को पुरानी बीमारी के लिए इलाज नहीं दे सकते हैं। यह आदेश सुपर स्पेशिएलिटी वाली बीमारियों के लिए है। अस्पताल में उपलब्ध इलाज मरीज को मिलेगा, लेकिन निजी अस्पताल में रैफर करना संभव नहीं ह