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जीवन में हमेशा त्याग की भावना रखें : शास्त्री

6 वर्ष पहले
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इंदौर| मूसाखेड़ीमें चल रही रामकथा के पांचवें दिन गुरुवार को पं. नारायण शास्त्री ने श्रीराम के वनवास गमन का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कथा का वर्णन करते हुए कहा- जो कैकेई श्रीराम से सबसे ज्यादा स्नेह करती थी उसी ने मोह वश में अपने पुत्र के लिए अयोध्या का राज्य तो मांगा ही, श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास भी मांग लिया ताकि भरत स्वतंत्र होकर राज्य कर सके। कैकेई ने यह वर मांग तो लिया लेकिन वह यह नहीं जानती थी कि जिस भरत के लिए उसने राज्य मांगा है, वह राज्य करेगा भी या नहीं। माता और पुत्र के विचारों में इतना परिवर्तन हो सकता है, मां पुत्र को राजा बनाना चाहती है जबकि पुत्र उसे किसी भी सूरत में लेना नहीं चाहता। श्रीराम जैसे प्रभु और भरत जैसा भक्त समूचे ब्रह्मांड में दूसरा कोई नहीं है। दुनिया में युगों-युगों से राज्य प्राप्त करने के लिए लड़ाइयां लड़ी गईं, परंतु श्रीराम और भरत एक-दूसरे को राज्य देने के लिए अड़े रहे। रामायण से शिक्षा लेकर जीवन में हमें हमेशा त्याग की भावना रखना चाहिए।