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इस बार समिट का फोकस, एशिया पेसिफिक में स्थापित हो मध्यप्रदेश
इसबार की ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट (जीआईएस) का फोकस इस बात पर होगा कि निवेश के क्षेत्र में उसका एशिया पेसिफिक में नाम हो। हर निवेशक मप्र को उद्योग मित्र राज्य के रूप में देखेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को मप्र भवन में समिट की तैयारियों को लेकर प्रेस से बात की। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार की समिट का उदघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने का लाभ मप्र को मिलेगा। वे निवेशकों को आकर्षित करने तथा उद्योग मित्र नीतियों के लिए जाने जाते हैं। मोदी 9 अक्टूबर को सुबह 10.30 बजे इंदौर में होने वाली जीआईएस-2014 का उद्घाटन करेंगे।
उन्होंने कहा कि हर दो वर्ष में एक बार होने वाली तीन सफल समिट आयोजनों और निवेश का लेखा जोखा भी इस बार जीआईएस में रखेंगे। मप्र बताएगा कि अब तक सवा लाख करोड़ रुपए की पूंजी का निवेश राज्य में हो चुका है। इसी तरह इस बार सारा ध्यान निवेशकों से एमओयू साइन करने से ऊपर उठकर अभिरूचि प्रदर्शन पर हस्ताक्षर समिट पूर्व उसके संपन्न होने के बाद भी करवाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि जीआईएस में कम से कम 50 देशों को भागीदार बनाने का लक्ष्य है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया, चेक गणराज्य, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड और स्पेन ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 8 अक्टूबर को लघु एवं मध्यम उद्योगों के उद्यमियों और निवेशकों का सम्मेलन होगा जिसका उद्घाटन केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री कलराज मिश्र करेंगे।
- जेटली से भी मिले शिवराज
शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय रक्षा एवं वित्त मंत्री अरुण जेटली से भी मुलाकात की। साथ ही बाबा अंबेडकर की जन्म स्थली महू में राष्ट्रीय स्मारक से सटी सैन्य भूमि के मसले, मनरेगा, केंद्रीय वित्त पोषित योजनाओं, किसानों की फसल क्षति के मुआवजे की राज्य को प्रतिपूर्ति सहित प्रदेश के सहकारिता परिदृश्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने जेटली से आग्रह किया कि महू में 4.52 एकड़ सैन्य भूमि राज्य को स्थानांतरित की जाए। यहां हर साल बाबा साहब के जन्म दिन पर विशाल जनसमूह एकत्रित होता है।