अवमानना की यािचकाएं भी लगीं
विश्वविद्यालय के पेंशनरों को अब तक छठे वेतनमान का लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा है?
यूनिवर्सिटीके पेंशनरों के लिए अलग से कार्पस फंड बनेगा। उसी फंड से उन्हें यह लाभ दिया जाएगा।
सारेविश्वविद्यालय पहले ही पेंशन फंड में अपना हिस्सा देने के लिए सहमति जता चुके हैं। फिर पेंशन देने कहां अड़चन है?
विश्वविद्यालयोंद्वारा दी गई राशि से यूनिवर्सिटी फंड बनेगा। इसका ब्याज आने पर ही तो कर्मचारियों की पेंशन निकलेगी।
सरकारने हाईकोर्ट से कहा था कि अप्रैल 2014 से छठे वेतनमान का लाभ दे देंगे?
यूनिवर्सिटीकर्मचारियों का मामला अलग है। उन्हें उच्च शिक्षा अनुदान आयोग कोष के नियमों के अनुसार ही यह लाभ मिलेगा। यही उनके हित में है। वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग की भी मंजूरी जरूरी होती है। नब्बे फीसदी काम हो चुका है। हम जल्द ही फाइल कैबिनेट में भेज रहे हैं। जल्द ही उन्हें इसका लाभ मिलेगा। किसी पेंशनर का हक नहीं मारा जाएगा।
^आधे वेतनमें घर चला रहे सेवानिवृत कर्मचारी
सरकारकी हठधर्मिता के कारण विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी आधे वेतन में घर चला रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा नुकसान चतुर्थ श्रेणी पेंशनरों का हो रहा है, क्योंकि पांचवें वेतनमान के हिसाब से उन्हें नाममात्र की राशि मिल रही है। हाईकोर्ट ने भी हमारे पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग उसे लागू करने को तैयार नहीं है।
हनुमंतसिंह रघुवंशी, हाईकोर्टसे केस जीतने वाले पेंशनर
^सालों कीसेवा का ऐसा सिला
शासनपर सिर्फ पेंशन की जिम्मेदारी है। अन्य राशि विश्वविद्यालय ही वहन करता है। पेंशन फंड में पैसे की कोई कमी नहीं है। वैसे भी सरकार ने स्वीकार किया था कि इसमें पैसे की कमी आने पर वह पूर्ति वह करेगी, लेकिन उल्टा हमसे ले रही है। सालों की सेवा के बाद भी कर्मचारियों को अपने अधिकार के लिए भटकना पड़ रहा है।
एसकेअग्रवाल, सचिव,पेंशनर एसोसिएशन, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर
^विभाग सेलूंगा जानकारी
यूनिवर्सिटीके पेंशनरों का मामला फिलहाल मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं 22-23 को भोपाल जाऊंगा। विभाग से बात कर इस बारे में जानकारी दे पाऊंगा।
दीपकजोशी, उच्चशिक्षा राज्यमंत्री, मप्र शासन