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हेयर रीग्रोथ के तीन तरीके

7 वर्ष पहले
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हेयरलॉस एक कॉमन प्रॉब्लम है। प्रदूषण, इम्प्रॉपर डाइट और केमिलकल बेस्ड प्रोडक्ट्स की वजह से यह अब असमय होने लगा है। हेसर ट्रांसप्लांट रीग्रोथ का एक तरीका है लेकिन इसे हर कोई नहीं करा रहा क्योंकि इसमें रिस्क भी है। ऑइल्स और लोशंस से भी बहुत अच्छे नतीजे नहीं मिल रहे हैं। ऑइल्स और ट्रांसप्लांट के बीच का एक तरीका होता है और वह मीज़ो थैरेपी। इसी कैटेगरी में दी जाने वाली पीआरपी थैरेपी अमेरिका में डेवलप की गई है और ज्यादातर लोग इसे पसंद कर रहे हैं। यह बताया डॉ. अनिल सोनी ने जो शहर में इस टेक्निक से ट्रीटमेंट कर रहे हैं।

%

हेयर लॉस महिलाओं में

30

%

की उम्र के बाद महिलाओं में भी यह प्रतिशत बढ़ जाता है

हेयर लॉस पुरुषों में

50

70

सर्जरी

{हेयरट्रांसप्लांट

{हेयर रीविविंग

मीज़ो थैरेपी

{इंजेक्शनऑफ कैमिकल ग्रोथ

फैक्टर्स इन स्कैल्प

ट्रीटमेंट

{ऑइल्सलोशंस

{पिल्स {आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट्स

हेयर लॉस के कारण

डाइट- जंकफूड रेगुलरली खाना हरी सब्ज़ियां कम खाना

स्ट्रेस-तनावमें हॉर्मोनल चेंजेस होंगे और बालों को नुकसान होगा

धुम्रपानऔर शराब- येदोनों व्यसन हेयरलॉस के हाई रिस्क फैक्टर्स हैं

इम्प्रॉपरहेयर केयर- बिज़ीलाइफ के चलते बालों की रेगुलर ऑइलिंग ऑर ठीक से वॉश हो पाना। शैम्पू, कंडीशनर और ऑइल भी करेक्ट चुनना एक वजह है।

ऐजिंग-उम्रके साथ हॉर्मोनल चेंजेस होंगे और इसे तो एक्सेप्ट करना ही होगा। हालांकि मीज़ो थैरेपी से इस टाइम पीरियड को आगे बढ़ाना मुमकिन है।

NEW TREATMENT

ऐसे होगा ट्रीटमेंट

डॉ.सोनी ने बताया कि पीआरपी यानी प्लेटलेट रिच प्लाज़्मा। इसमें व्यक्ति का 15 से 20 ग्राम ब्लड लेकर उसे मशीन से प्रोसेस किया जाता है। ब्लड में काफी प्लेटेलेट्स होते हैं जिनमें ग्रोथ फैक्टर्स होते हैं। खून में से सिर्फ प्लेटलेट्स को अलग करके डर्मापंच मशीन से सिर की त्वचा में इंजेक्ट कर रहे हैं। इस प्रोसेस में सिर्फ एक घंटा लगे रहा है। दर्द हो इसके लिए सिर की त्वचा को सुन्न किया जाता है।

मंगलवार को वर्कशॉप में डॉ. अनिल सोनी ने एडवांस हेयर ट्रीटमेंट की जानकारी दी।

आपके ही ब्लड कम्पोनेंट्स से करेंगे बालों की रीग्रोथ