इंदौर. यूनिवर्सिटीके स्कूल ऑफ लाइफ साइंस विभाग में पीएचडी के नौ छात्रों ने कोर्स वर्क की परीक्षा में नहीं बैठने देने पर मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत कर दी। कुलपति ने एचओडी डॉ. सुरेश चांद से जवाब मांगा तो पहले कहने कि आप यहां के मुखिया हैं।
जो निर्णय देंगे, वह मंजूर होगा। फिर बोले कि छात्रों के परिजन आकर धमका रहे हैं। मुझे कुछ हो जाए तो मेरा नेत्रदान करवा दीजिएगा। छात्रों ने आराेप को गलत बताया तो एचओडी ऑर्डिनेंस का हवाला देने लगे। बाद में कुलपति ने छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी। इस दौरान दो-तीन छात्राएं रो पड़ीं।
दरअसल, इन छात्रों को छह माह का कोर्स वर्क कर परीक्षा में शामिल होना था। इसके बाद उन्हें गाइड अलॉट कर रिसर्च शुरू होती। सोमवार से इनकी परीक्षा शुरू हुई, लेकिन एक दिन पहले रविवार को डॉ. चांद ने नोटिस जारी किया।
उसमें कहा गया कि इन छात्रों की उपस्थिति 75 फीसदी से कम है। इसलिए वह परीक्षा में नहीं बैठ सकते। उधर, छात्रों ने कहा कि उन्होंने तो अतिरिक्त कक्षाएं कर उपस्थिति पूरी की थी। वह नालंदा परिसर में प्रभारी कुलपति के पास भी शिकायत करने गए थे, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
जनसुनवाई में पहुंचे छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी हाजिरी पर्चे पर ली जाती थी और रजिस्टर पर मनमर्जी से उन्हें अनुपस्थित लिखा गया। पहले उन्हें कम उपस्थिति का नोटिस भी नहीं दिया। जिस विषय में 80 फीसदी उपस्थिति है, उसका भी पेपर नहीं देने दिया।
इस पर कुलपति डॉ. डी.पी. सिंह ने डॉ. चांद से जवाब मांगा तो वह इमोशनल बातें करने लगे। इस कुलपति ने कहा मुद्दे की बात पर आइए। आप खुद निर्णय क्यों नहीं लेते? बाद में छात्राें को परीक्षा देने की अनुमति दी गई। गौरतलब है कि दो साल में विभागाध्यक्ष के खिलाफ 24 शिकायतें मिल चुकी हैं।
मनमर्जी से अनुपस्थित बताने का आरोप
शपथ-पत्र देकर की शिकायत
उधर,आईआईपीएस में फीस नहीं भरने पर एससी/एसटी के जिन छात्रों को परीक्षा देने से रोका गया, उन्होंने भी शपथ-पत्र पर शिकायत की। उन्होंने कहा कि उन्हें स्कॉलरशिप नहीं मिलने से वह फीस नहीं भर पाए। स्कॉलरशिप देने के नाम पर कर्मचारी गजेंद्र शर्मा ने उनसे पैसा मांगा था। पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था। छात्रों ने वह आदेश भी पेश किया, जिसमें लिखा